मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का चढ़ा सुरूर कागज के बजाय प्लास्टिक के पतंगों की मांग बढ़ीप्रतिनिधि, भभुआ (नगर) मकर संक्रांति को लेकर बच्चों में पतंग खरीदने की होड़ मची है. बच्चे इस पारंपरिक खेल के प्रति काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं. बदलते परिवेश में इसका तरीका भी बदल गया है. पहले बच्चे अपने घरों में ही स्वयं पतंग व उचका(लटाई) बना कर धागे का मांझा कर पतंग उड़ाने का आनंद लेते थे. लेकिन, समय के अनुसार इसमें भी बदलाव आया है. बदलते परिवेश में सब कुछ रेडिमेड हो गया है. पिछले दो दशक से इसमें काफी बदलाव देखा जा रहा है. मूल रूप से इसे ग्रामीण परिवेश का खेल माना जाता था, लेकिन इसका विस्तार अब शहरी क्षेत्रों में व्यापक रूप से हुआ है. परिणाम है कि अब इसका समय निर्धारित हो गया है और यह मकर संक्रांति का खेल बन कर रह गया है. पहले कागज के पतंग बनाये जाते थे, जो काफी हल्के होने के साथ दूर आसमान तक जाते था. बदले परिवेश में अब कागज के इक्का-दुक्का पतंग कहीं-कहीं दिखाई पड़ते हैं. अब इनका स्थान रंग-बिरंगे प्लास्टिक के पतंगों ने ले लिया है. सुपर हीरो की तसवीरों वाली पतंग की है मांग बाजारों में पतंगों पर स्पाइडर मैन व छोटा भीम जैसे सुपर हीरो की तसवीर वाले पतंगों की डिमांड है. इसके अलावा फिल्मी सितारे व मोदी छाप पतंग भी बच्चों की पहली पसंद बना हुआ है. उचका (लटाई) व धागा में भी परिवर्तन हुआ है. अब धागा को मांझा करने की जरूरत नहीं होती. मांझा किया हुआ धागा भी बाजारों में उपलब्ध है.क्या कहते हैं विक्रेता पतंग व्यवसायी अहमद व चुन्नू कहते हैं कि पतंगों व उच्चका(लटाई) का निर्माण पटना, बनारस व गया में व्यापक पैमाने पर होता है. अच्छी क्वालिटी के धागे बनारस से मंगाये जाते हैं. जैसे-जैसे मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आते जा रहा, पतंगों की मांग बढती जा रही है. पिछले वर्ष की अपेक्षा मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. क्या हैं पतंगों की कीमतप्लेन बड़ा पतंग-3 रुपये तसवीर वाला पतंग- 5 से 15 रुपये छोटा पतंग- दो रुपये उचका (लटाई)- 15 से 100 रुपया मंझा धागा – 50 से 500 रुपये तक सादा धागा – 10 से 20 रुपये तक फोटो:-10.पतंग दुकानों में पतंग खरीदते बच्च
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का चढ़ा सुरूर
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का चढ़ा सुरूर कागज के बजाय प्लास्टिक के पतंगों की मांग बढ़ीप्रतिनिधि, भभुआ (नगर) मकर संक्रांति को लेकर बच्चों में पतंग खरीदने की होड़ मची है. बच्चे इस पारंपरिक खेल के प्रति काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं. बदलते परिवेश में इसका तरीका भी बदल गया है. पहले बच्चे अपने घरों […]
