Jehanabad : आंवले की पूजा व गुप्त दान कर सुख-समृद्धि का मांगा आशीर्वाद

कार्तिक महीने के नवमी तिथि को अक्षय नवमी का पर्व आदिकाल से मनाया जा रहा है. इसे आंवला नवमी भी कहते हैं पुरानी मान्यता है कि इस दिन किया गया पूजा पाठ उपवास दान उपादान अक्षय होता है यानी इसका नाश नहीं होता.

जहानाबाद/घोसी. कार्तिक महीने के नवमी तिथि को अक्षय नवमी का पर्व आदिकाल से मनाया जा रहा है. इसे आंवला नवमी भी कहते हैं पुरानी मान्यता है कि इस दिन किया गया पूजा पाठ उपवास दान उपादान अक्षय होता है यानी इसका नाश नहीं होता. इस दिन गुप्त दान का भी अपना एक महत्व है. कहा जाता है कि अक्षय नवमी के दिन भगवान विष्णु आंवला के पेड़ पर वास करते हैं इसलिए श्रद्धालु उपवास कर अक्षय नवमी के दिन आंवला के पेड़ के नीचे पूजा पाठ दान उपादान और खासकर कुष्मांडा का दान करते हैं. कुष्मांडा के भीतर गुप्त दान के रूप में श्रद्धालु यथाशक्ति सोने चांदी का भी दान करते हैं. जिले में भी अक्षय नवमी का त्यौहार पुरानी परंपरा के अनुसार श्रद्धा और भक्ति के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. गुरुवार को नवमी तिथि सुबह 10:03 से शुरू हुई. यह शुक्रवार को 10:06 पर समाप्त होगा. अक्षय नवमी की पूजा और दान आंवले के वृक्ष के नीचे दिन में ही होता है इसलिए जिले के ज्यादातर श्रद्धालुओं ने अक्षय नवमी का व्रत और पूजा-पाठ का आयोजन गुरुवार को ही किया हालांकि कुछ श्रद्धालु उदीयमान तिथि के अनुसार इस शुक्रवार की सुबह करेंगे. हालांकि शुक्रवार को उन्हें उपवास पूजा दान उपवन आदि सुबह 10 के पहले समाप्त करना होगा. जहानाबाद शहर के गौरक्षणी में मुख्य रूप से अक्षय नवमी की पूजा होती है. गौरक्षणी में पुराना मंदिर है और मंदिर के प्रांगण में ही आवाले का पेड़ है जिसके नीचे सदियों से अक्षय नवमी का त्यौहार मनाया जाता है. इसके आसपास कई बगीचे थे जिसकी जमीन अब बिक गई और वहां मकान खड़े हो गए. हालांकि मंदिर का परिसर अभी भी मौजूद है जहां मुख्य रूप से अक्षय नवमी का त्यौहार मनाया जाता है. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु खासकर महिलाओं ने उपवास रखा और आंवले के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना की. पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने पुरोहित को दान दक्षिणा दी. इस मौके पर बड़े पैमाने पर कुष्मांडा यानी भूरा का दान किया गया. बहुत सारे श्रद्धालुओं ने कुष्मांडा को काटकर उसमें गुप्त रूप से दान वाली चीज रखकर गुप्त दान किया. गुप्त दान में ज्यादातर महिलाएं सोने अथवा चांदी का दान करती है. सोने की कीमत बहुत अधिक होने के कारण अब चांदी का दान अधिक होता है. पूजा-पाठ और दान उपदान के बाद श्रद्धालुओं ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन किया. पहले आसपास के बगीचे में बड़े पैमाने पर अक्षय नवमी के अवसर पर लोग भोजन बनाते थे और पूरे परिवार और इष्ट मित्र के साथ वही आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करते थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mintu kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >