कलश स्थापना के साथ वासंतिक नवरात्र शुरू, मां शैलपुत्री की हुई आराधना

कलश स्थापना के साथ ही गुरुवार से वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हो गया. पहले दिन श्रद्धालुओं ने घरों व मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गयी.

जमुई. कलश स्थापना के साथ ही गुरुवार से वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हो गया. पहले दिन श्रद्धालुओं ने घरों व मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गयी. मुख्यालय स्थित बोधवन तालाब के पास श्रीश्री 108 चैती वैष्णवी दुर्गा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना की गयी. इसके बाद आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हुआ.

भारतीय नववर्ष विक्रम संवत् 2083 आरंभ

वासंतिक नवरात्र के साथ ही भारतीय नववर्ष विक्रम संवत् 2083 की भी शुरुआत हो गयी. इस अवसर पर लोगों ने नव वर्ष के स्वागत के साथ घरों में पूजा-पाठ कर मंगलकामनाएं की. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही प्रथम स्वरूप हैं. नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा से साधक का मूलाधार चक्र जागृत होता है और आत्मबल में वृद्धि होती है. मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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