देवता की पूजा से पूर्व स्वयं में देवत्व का जागरण आवश्यक : कैलाशानंद
जिले की सुरम्य वादियों में बसा ‘मिनी शिमला’ इन दिनों भक्ति और अध्यात्म के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है.
By PANKAJ KUMAR SINGH | Updated at :
सिमुलतला. जिले की सुरम्य वादियों में बसा ‘मिनी शिमला’ इन दिनों भक्ति और अध्यात्म के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है. यहां श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीश्री 1008 शिवशक्ति महायज्ञ एवं श्रीशिव महापुराण कथा से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया है. कथा सुनने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज ने शिव तत्व की गहरी व्याख्या की. उन्होंने कहा कि जब मनुष्य भक्ति से दूर हो जाता है तो उसके जीवन में यश के साथ-साथ अपयश भी आने लगता है, लेकिन जब भगवान महादेव की कृपा होती है तो उसे सुयश की प्राप्ति होती है. स्वामी कैलाशानंद गिरि ने श्रद्धालुओं को आचरण की शुद्धि का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि शिव की उपासना करने से पहले मनुष्य को अपने जीवन में शिव के आदर्शों को धारण करना चाहिए. शास्त्रों में कहा गया है “देवं भूत्वा देवं यजेत”, अर्थात देवता की पूजा करने से पहले स्वयं के भीतर देवत्व का जागरण आवश्यक है.
माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में माता-पिता और गुरु की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है. जो व्यक्ति अपने माता-पिता और गुरु का अपमान करता है या साधु-संतों के प्रति सम्मान नहीं रखता, वह राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है. उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि शिवपुराण की कथा को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें. सेवाधाम आश्रम में आयोजित यह महायज्ञ बीते 9 मार्च से शुरू होकर 17 मार्च तक चलेगा. इस दौरान जमुई, बांका और पड़ोसी राज्य झारखंड के देवघर सहित कई जिलों से हजारों श्रद्धालु कथा सुनने पहुंच रहे हैं. जैसे ही स्वामी जी ‘नमः शिवाय’ का उद्घोष करते हैं, पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठता है. संस्कार टीवी के माध्यम से कथा का सीधा प्रसारण देश-विदेश में भी किया जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान मंच पर आचार्य पवन दत्त मिश्रा, प्रमोद पांडेय, सुनील पांडेय, चंदन पांडेय, सतीश राय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. वहीं यज्ञ समिति और स्थानीय प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इसमें मुख्य रूप से झाझा एसडीपीओ राजेश कुमार, निरीक्षक अरुण सिंह और थानाध्यक्ष रूबी कुमारी सक्रिय रूप से व्यवस्था में जुटे हुए हैं.