बरहट. मलयपुर स्थित शिवाला मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय कुंडीय गायत्री महायज्ञ सह प्रज्ञापुराण कथा का शुक्रवार को दीपयज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ. कार्यक्रम के दौरान सरल श्रद्धा के प्रतीक का विशेष पूजन व गुरु दीक्षा समारोह आयोजित किया गया. आचार्य छबिलाल ने प्रवचन देते हुए कहा कि सदगुरु के संरक्षण में मनुष्य यज्ञमय जीवन जीना सीखता है. यज्ञ हमारे व्यक्तित्व, कृतित्व व आचरण में सदाचार के रूप में प्रकट होता है तथा यज्ञमय जीवन प्रभु समर्पण, देवत्व, सुख, शांति और पवित्रता का प्रतीक है. प्रवचन के बाद आयोजित दीपयज्ञ का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा. हजारों महिलाओं ने अपने घरों से दीप लाकर एक दीप घर ले जाने व तीन दीप स्थल पर जलाने की परंपरा निभायी. जब महिलाएं सिर पर पूजा की थाली में सजे दीप लिए खड़ी थीं तो पूरा परिसर मानो सितारों की रोशनी से जगमगा उठा. इस अद्भुत दृश्य को श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल में कैद किया. श्रद्धालुओं ने बताया कि ऐसा नजारा वर्ष 2012 के महायज्ञ में देखने को मिला था और एक बार फिर वैसी ही भव्यता दिखाई दी. उस समय 100 से अधिक लोगों ने दीक्षा ग्रहण की थी, जबकि इस बार 86 श्रद्धालुओं ने महागायत्री यज्ञ में दीक्षा ली. आयोजकों ने अगले वर्ष इसी माह में पुनः आयोजन करने की घोषणा भी की. अंतिम दिन भंडारे का भी आयोजन किया गया. इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. कार्यक्रम में मुख्य यजमान रूपल सिंह व उनकी धर्मपत्नी स्वेता सिंह सहित गायत्री परिवार के रवि मिश्रा, बिनु सिंहा, सूरज पाल, सानू पाल, चंदन पंडित और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
दीप यज्ञ के साथ नौ दिवसीय गायत्री महायज्ञ का भव्य समापन, 86 श्रद्धालुओं ने ली दीक्षा
मलयपुर स्थित शिवाला मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय कुंडीय गायत्री महायज्ञ सह प्रज्ञापुराण कथा का शुक्रवार को दीपयज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ.
