प्रताड़ना व दबाव के आरोपों से गरमाया मामला, अस्पताल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल जमुई. सदर अस्पताल में बीते मंगलवार की देर शाम एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी ने सीएस के सामने ही सल्फास खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था. अब कर्मचारी की स्थिति खतरे से बाहर बताया जा रहा है. कर्मचारी संतोष कुमार चौरसिया ने कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना और दबाव से परेशान होकर यह कदम उठाने की बात कही. बीते मंगलवार की रात इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ मनीष कुमार ने बताया कि समय रहते उचित इलाज मिलने के कारण मरीज की जान बच गयी. उन्होंने कहा कि सल्फास की कम मात्रा ही शरीर के अंदर गयी थी, जिसे तुरंत उपचार और उल्टी के जरिये बाहर निकाल दिया गया, इससे स्थिति नियंत्रण में आ गयी. पीड़ित कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि पिछले एक सप्ताह से उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. उसका कहना है कि सीएस द्वारा न केवल कार्यस्थल पर दबाव बनाया जा रहा था, बल्कि निजी आवास पर भी काम करवाने का दबाव दिया जाता था. मना करने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी. इसी मानसिक तनाव के कारण यह आत्मघाती कदम उठाया. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. कर्मचारियों के साथ इस तरह के व्यवहार और कार्यस्थल की परिस्थितियों को लेकर अब जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गयी है. —- मेरे ऊपर लगाये जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद है. चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संतोष कुमार चौरसिया माली के पद पर पदस्थापित है तो माली का कार्य करें. इसमें प्रताड़ित करने वाली कौन सी बात है. संतोष कुमार चौरसिया को नेत्र शल्य कक्ष में ड्यूटी किसने लगायी ये जांच का विषय है. जांच की जा रही है, दोषी पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी. डॉ अशोक कुमार सिंह, सीएस
सल्फास खाकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले कर्मचारी की हालत अब खतरे से बाहर
सदर अस्पताल में बीते मंगलवार की देर शाम एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी ने सीएस के सामने ही सल्फास खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था.
