जमुई. कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में सूकर पालन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मंगलवार को हुआ. केंद्र के प्रमुख डॉ सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि जमुई जिले में सूकर पालन को व्यावसायिक रूप से अपनाने की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि जिले के आदिवासी समाज के किसान पहले से ही छोटे स्तर पर सूकर पालन करते हैं, आवश्यकता है कि उन्हें आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी से सशक्त बनाया जाये. उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आदिवासी किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई. इसके लिए मीडिया के माध्यम से किसानों को सूचना दी गई और ‘प्रथम आओ–प्रथम पाओ’ के आधार पर किसानों का नामांकन किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत छह मार्च को हुई थी, जिसका समापन 10 मार्च को हुआ. कार्यक्रम के दौरान बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. दहिया, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. सरोज कुमार, डॉ. डीएन सिंह, डॉ. भावना और डॉ. पंकज कुमार सहित जिला पशुपालन पदाधिकारी जमुई तथा केंद्र के वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देकर प्रतिभागियों को सूकर पालन की वैज्ञानिक जानकारी दी. प्रशिक्षण में सूकर पालन का परिचय, नस्ल चयन एवं प्रजनन प्रबंधन, नियमित देखभाल, आहार प्रबंधन, चारा एवं फीड फॉर्मूलेशन, फीड की दक्षता, प्रमुख रोग एवं टीकाकरण, कृषि अवशेषों के उपयोग, केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा सूकर पालन के अर्थशास्त्र व एसडब्ल्यूओटी विश्लेषण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गयी. कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के पशु चिकित्सक डॉ प्रवीण कुमार ने किया. प्रशिक्षण में बरहट, झाझा, लक्ष्मीपुर, खैरा और चकाई प्रखंडों के किसानों ने भाग लिया. विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से सूकर पालन कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.
जमुई में सूकर पालन की अपार संभावनाएं : डॉ सुधीर
कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में सूकर पालन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मंगलवार को हुआ.
