राजापाकर. बीएमडी महाविद्यालय, दयालपुर के सभागार में राष्ट्रीय सेवा योजना ने शुक्रवार को पराक्रम दिवस मनाया. कार्यक्रम का संचालन पदाधिकारी प्रो रवि रंजन कुमार ने किया. इस दौरान प्राचार्य डॉ श्याम रंजन प्रसाद सिंह ने शिक्षकों एवं छात्रों के साथ सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. प्राचार्य ने कहा कि पराक्रम हमारे साहस का प्रतीक है. देश ने गुलामी को चुनौती दी थी. पराक्रम हमारे विचारों में ही नहीं बल्कि व्यवहारों में भी होना चाहिए. हमारा सर्वोपरि लक्ष्य देश की सेवा होना चाहिए. आजादी का मार्ग अहिंसा के अलावा साहस, संगठन और समर्पण से भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि सुभाष चंद्र बोस ने सेना को संगठित किया और आजादी का एहसास आम नागरिकों तक पहुचाया.
देश से बढ़कर कुछ भी नहीं
प्रो अनामिका कुमारी ने कहा कि देश से बढ़कर कुछ नहीं है. साहस ऐसा हथियार है, जिससे इंसान किसी भी समस्या का समाधान खोज लेता है. इसलिए हमें सुसंगठित होकर देश के लिए कार्य करना चाहिए. तब देश सचमुच में विश्व गुरु बनेगा. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो सुशील कुमार ने दिया. मौके पर छात्र सचिन कुमार, सोनू कुमार, नीरज कुमार और छात्राओं रोशनी कुमारी, नेहा कुमारी, मेघा कुमारी, स्मिता कुमारी ने भी अपने विचार प्रकट किये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
