Bihar, संजय कुमार अभय, गोपालगंज: दिल्ली के रानी बाग इलाके में चलती बस में हुई सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज वारदात के बाद अब इस मामले का कनेक्शन बिहार के गोपालगंज से जुड़ गया है. जिस बस का इस्तेमाल इस अपराध में हुआ, वह गोपालगंज नंबर से रजिस्टर्ड बताई गई है. जांच में सामने आया है कि बस साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज थी और इस पर पहले से भारी जुर्माना बकाया था. घटना के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
यात्री बस को टूरिस्ट बस के रूप में चलाने का आरोप
शुरुआती जांच में पता चला है कि बस का उपयोग यात्री परिवहन के लिए किया जा रहा था, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन टूरिस्ट परमिट के तहत कराया गया था. नियमों के उल्लंघन, परमिट गड़बड़ी, इंश्योरेंस और ओवरलोडिंग समेत कई मामलों में बस पर करीब 1.37 लाख रुपये का जुर्माना पहले से बकाया था. जुर्माना नहीं भरने पर विभाग ने बस को डिजिटल रूप से इंपाउंड भी किया था, लेकिन इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा.
गोपालगंज से दिल्ली तक रोज चलती रही बस
बताया जा रहा है कि बस का मालिक गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है और यह बस मुजफ्फरपुर से दिल्ली रूट पर लगातार चलाई जा रही थी. बलथरी चेकपोस्ट से रोज गुजरने के बावजूद विभागीय स्तर पर बकाया वसूली या सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी. अब घटना सामने आने के बाद अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
वारदात की रात क्या हुआ
दिल्ली पुलिस के अनुसार घटना 11 और 12 मई की रात की है. पीड़िता फैक्ट्री से काम खत्म कर घर लौट रही थी, तभी उसे जबरन बस में खींच लिया गया. आरोप है कि बस चालक और कंडक्टर ने करीब दो घंटे तक चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी यूपी के रहने वाले बताए जा रहे हैं.
विभागीय सिस्टम पर उठे सवाल
डीटीओ ने माना कि बस पर बकाया जुर्माना था और उसे डिजिटल इंपाउंड किया गया था. इसका मतलब था कि दस्तावेज ऑनलाइन सिस्टम में ब्लॉक थे, लेकिन जमीनी स्तर पर बस का संचालन पूरी तरह बंद नहीं हुआ. यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि डिजिटल कार्रवाई के बावजूद बस सड़क पर कैसे दौड़ती रही.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
बिहार से दूसरे राज्यों तक बस नेटवर्क पर भी चर्चा तेज
जानकारों का कहना है कि बिहार से दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए रोज बड़ी संख्या में बसें चलती हैं. इनमें कई बसें टूरिस्ट परमिट पर यात्री सेवा देती हैं. ऐसे में इस घटना ने पूरे सिस्टम की निगरानी और जांच व्यवस्था पर नई बहस खड़ी कर दी है.
इसे भी पढ़ें: बिहार में 16 मई तक FRS नहीं कराया तो अटक सकती है हजारों शिक्षकों की सैलरी, विभाग ने जारी किया आदेश
