Bihar News: गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड में स्थित महेंद्र दास इंटर कॉलेज में शिक्षकों को अनुदान की राशि देने में एक करोड़ की हेराफेरी की जांच शिक्षा विभाग शुरू कर दिया है. कालेज में कार्यरत अर्थशास्त्र के शिक्षक संजय वर्मा को अनुदान की राशि दो वर्ष का 85-85 हजार का दो चेक दिया गया.
उसके साथ ही प्राचार्य निभा तिवारी के द्वारा अपने रिश्ते के भाई राजीव मिश्रा के नाम से एक लाख का चेक लेकर राशि ले लिया गया. शिक्षक ने कहां मजबूरी में राशि को लौटाया.
शिक्षकों का आरोप प्राचार्य अपने भाई के माध्यम से डरा- धमका कर पैसे की उगाही करती है
उनके जैसे लगभग सभी शिक्षकों के साथ डरा- धमका कर राशि लौटवाया गया है. कॉलेज में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के मद में सत्र 2015-17 एवं 2016-18 के लिए बिहार सरकार एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा दिनांक 06 दिसंबर 2025 को महाविद्यालय के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से एक करोड़ रुपये भेजे गये थे.
उसके बाद प्राचार्य ने अपने कथित भाई के साथ कर्मियों को डरा-धमकाकर, सादे कागज पर हस्ताक्षर कराकर, केस में फंसाने तथा कॉलेज से बर्खास्त करने की धमकी देकर चेक के माध्यम से भुगतान किया गया तथा दी गयी राशि का आधा हिस्सा किसी न किसी माध्यम से वापस वसूल लिया गया.
हाइलेबल जांच शुरू होने के बाद उजागर हुआ मामला
अब मामले की हाइलेबल जांच शुरू होने के बाद गड़बडियों का दायरा और बढ़ने की संभावना बढ गयी है. डीइओ योगेश कुमार ने बताया कि कॉलेज में धांधली का कागजाती साक्ष्य सामने आये है. जिसे गंभीरता से जांच किया जा रहा. दोषी चाहे जो भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा.
जांच टीम ने शिकायत करने वाले से भी मांगे साक्ष्य
महेंद्र दास इंटर कॉलेज में हुए धांधली की जांच कर रहे डीपीओ माध्यमिक प्रवीण कुमार प्रभात ने काॅलेज के खिलाफ लगाये गये आरोपों की पुख्ता साक्ष्य लेकर सोमवार तक देने का आदेश दिया है. जिससे कार्रवाई करना आसान हो सके. शिकायतकर्ताओं की ओर से कई चेक दिये गये है. जिसमें साफ होता है कि कैसे राशि का विचलन किया गया है.
शिक्षकों का आरोप प्राचार्य यूपी से गोपालगंज में कॉलेज का संचालन करवाती है
अमितेश कुमार श्रीवास्तव, पांडेय चिंतामणि, अनिता कुमारी, रंजीता कुमारी, रामाशंकर की ओर से डीएम को दिये गये शिकायत में आरोप लगाया कि महेंद्र दास इंटर कॉलेज के प्राचार्य अपने कथित भाई के लिए यूपी के सलेमगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलवा कर वहीं से कॉलेज का संचालन किया जाता रहा.
कॉलेज से होने वाले आय का खर्च भी प्राइवेट स्कूल में लगाया गया है. इस बीच इंटर कॉलेज का कोड भी सरकार ने बंद कर दिया. जिसे आजतक नहीं खोलवाया गया और इंटर कॉलेज में काम करने वाले 75 से अधिक शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मी बेरोजगार हो गये है.
आरोपों व उसके साक्ष्यों की हो रही जांच : विभाग
डीइओ योगेश कुमार ने बताया कि इंटर कॉलेज के कर्मियों व शिक्षकों के आराेपों की जांच हो रही है. साक्ष्यों को खंगाला जा रहा. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
