Gopalganj News : भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान की द्वितीय बैठक आयोजित की गयी. बैठक में भोजपुरी भाषा के मानकीकरण, संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. राष्ट्रीय और प्रांतीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया.
बैठक के दौरान केंद्रीय समिति का विस्तार करते हुए डॉ. संध्या सिन्हा, टाटानगर को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया. वहीं डॉ. हेल्श कुमार सिंह, बलिया, डॉ. संपत कुमार, वाराणसी, डॉ. अनिल कुमार, गोरखपुर, राजेश्वर प्रसाद, गोपालगंज, डॉ. उमेश कुमार, गाजीपुर और कमरुद्दीन अंसारी, छपरा सहित कई लोगों को केंद्रीय समिति में शामिल किया गया.
कई राज्यों में संगठन को मजबूत करने पर जोर
बैठक में दक्षिण बिहार और झारखंड की कार्यकारिणी के पुनर्गठन पर चर्चा की गयी. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में संगठन की एकल इकाई बनाने और पश्चिम बंगाल में नयी इकाई को मजबूत करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ.
भोजपुरी भाषा के मानकीकरण के लिए योजना तैयार करने और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया. पश्चिम बंगाल में होने वाले संस्थान के सातवें अधिवेशन की तैयारियों को लेकर भी रूपरेखा तय की गयी.
राष्ट्रीय युवा कार्यकारिणी की घोषणा
बैठक में राष्ट्रीय युवा कार्यकारिणी की भी घोषणा की गयी. सूर्यप्रकाश उपाध्याय को संगठन मंत्री, रजनीश राय को सह संगठन मंत्री, जलज कुमार अनुपम को संगठन सचिव, अखिलेश्वर पांडेय को उपाध्यक्ष और सुधीर त्रिपाठी को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गयी.
उत्तर बिहार कार्यकारिणी का भी गठन
उत्तर बिहार कार्यकारिणी में डॉ. सुनील कुमार को अध्यक्ष, दिलीप सिंह को महामंत्री, राकेश कुमार विद्यार्थी को संगठन मंत्री और विक्रम चौधरी को संगठन सचिव बनाया गया. वहीं दिनेश गुप्ता, गणपति सिंह गगन और डॉ. सुदर्शन यादव को उपाध्यक्ष तथा राजू राय को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गयी.
भोजपुरी के साहित्यिक विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प
बैठक में संस्थान के अध्यक्ष अशोक सिंह, गोरखनाथ यादव ‘गुंजन’, डॉ. जैनेन्द्र कुमार शुक्ल ‘प्रभात’, जयहिंद साह, बृजमोहन अनाड़ी, उमाशंकर साहू, मूंगा लाल शास्त्री, अनिल कुमार शर्मा और विभांक धर मिश्र समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे.
बैठक में पदाधिकारियों ने भोजपुरी भाषा को व्यापक स्तर पर स्थापित करने और इसके साहित्यिक विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया.
