बैंकों का खजाना खाली, ग्राहकों की बढ़ीं मुश्किलें

नोटबंदी से भी भयावह स्थिति का सामना कर रहे ग्राहक आरबीआइ से करेंसी नहीं मिलने से चरमरायी व्यवस्था गोपालगंज : आठ नवंबर को देश में नोटबंदी लागू की गयी. तब इतनी भयावह स्थिति नहीं थी. शादी-विवाह से लेकर दवा इलाज कराने तक के लिए पैसे का अकाल पड़ा हुआ है. शहर में कुल 29 एटीएम […]

नोटबंदी से भी भयावह स्थिति का सामना कर रहे ग्राहक

आरबीआइ से करेंसी नहीं मिलने से चरमरायी व्यवस्था
गोपालगंज : आठ नवंबर को देश में नोटबंदी लागू की गयी. तब इतनी भयावह स्थिति नहीं थी. शादी-विवाह से लेकर दवा इलाज कराने तक के लिए पैसे का अकाल पड़ा हुआ है. शहर में कुल 29 एटीएम में से महज तीन से पैसे निकल रहे हैं. बाकी एटीएम में कैश के अभाव होने से ताला लगा हुआ है. शहर में 21 ऐसी एटीएम हैं, जहां नोटबंदी के दौरान लगा ताला आज तक नहीं खुला. एटीएम में कैश डालनेवाली एजेंसियों को जो भी नकदी मिली थी, उन्होंने एटीएम में डाल दिये थे वह दो घंटे में समाप्त हो जा रहे थे.
एटीएम का हाल बुरा रहा. जिन लोगों को नकदी निकालने थे, वह एटीएम के चक्कर काटते रहे. सरेया के रहनेवाले समीर कुमार हजियापुर रोड में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की एटीएम पर पहुंचे, लेकिन उसमें रुपये ही नहीं थे. इसके पश्चात आइसीआइसीआइ बैंक और एसबीआइ की एटीएम पर गये. नकदी न होने के कारण शटर गिरा हुआ था.
शाही गैस एजेंसी और चंद्रगोखुल रोड पर पंजाब नेशनल बैंक में ताला लटका रहा है. यूनियन बैंक और यूको, इलाहाबाद बैंक, सिंडिकेट बैंक, देना बैंक, विजया बैंक, सेंट्रल बैंक, आरिएंटल बैंक आदि की एटीएम में भी कैश न मिलने पर वह वापस लौट गये. इशुआपुर के रहनेवाले विपीन दुबे के बेटे की शादी तय है. 26 मई को तिलक है. इधर, शादी की तैयारी की खरीदारी में कैश की जरूरत आ पड़ी है. एसबीआइ की एटीएम पर दो घंटे तक लाइन में लगे रहे. उनकी बारी आयी तो कैश खत्म हो गया. इसके बाद दो एटीएम में और गये, लेकिन एटीएम खाली होने पर उल्टे पांव लौट गये. शहर की तमाम एटीएम में कमोबेश यही स्थिति रही.
प्राइवेट बैंकों की एटीएम में थोड़ी राहत : भारतीय रिजर्व बैंक से नकदी न मिलने पर सरकारी बैंकों की हालत खस्ता हो चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि अभी आरबीआइ से नकदी आने की उम्मीद कम है. बैंक निरंतर आरबीआइ से नकदी की मांग कर रहे हैं. पैसे न मिलने के कारण सरकारी बैंक की एटीएम नहीं चल पा रही हैं. मगर, प्राइवेट बैंक की एटीएम जैसे-तैसे चल रही हैं. इससे लोगों को थोड़ी राहत है.
बैंकों के सामने चुनौती : आरबीआइ से स्टेट बैंक के चेस्ट को करेंसी उपलब्ध नहीं कराया गया है.
उम्मीद थी कि सोमवार की रात करेंसी उपलब्ध होगी. अब अगले सप्ताह ही कैश मिलने की संभावना जतायी जा रही है. बैंकों में अभी ग्राहकों को जैसे-तैसे नकदी मिल जा रही है. शहर की शाखाओं में तो हालत थोड़ी ठीक है, मगर ग्रामीण क्षेत्र की हालत काफी खराब है. बड़ी मुश्किल से ग्राहकों को 10 हजार रुपये मिल पा रहे हैं. सबसे खराब स्थिति ग्रामीण बैंक की है, जहां ग्राहकों को अपना ही पैसा नहीं मिल पा रहा है. इतना ही नहीं ग्राहकों का आक्रोश भी बैंक झेल रहे हैं.
25 दिनों से बैंकों की हालत दयनीय : स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक को अपना चेस्ट होने के कारण ये दोनों बैंक ग्राहकों के सबसे प्रिय बने हुए थे. आज सबसे भयावह स्थिति इनकी है. बैंक पिछले 25 दिनों से ग्राहकों के आक्रोश को झेल रहे हैं. स्थिति यह है कि ग्राहकों का आक्रोश आये दिन फूट रहा है. इसके पहले सासामुसा में एनएच-28 को जाम कर ग्राहकों ने हंगामा किया था. दिघवा दुबौली समेत कई शाखाओं में नो कैश का बोर्ड लगाया गया था.
क्या कहते हैं अधिकारी
आरबीआइ से कैश नहीं मिलने के कारण स्थिति बिगड़ी है. कब तक दुरुस्त होगा कहना मुश्किल है. ऐसे में ग्राहकों से सहयोग की अपील की जा रही है. कैश आरबीआइ से मिलते ही बैंकों को उपलब्ध करा दिया जायेगा. उम्मीद है कि जल्दी ही आरबीआइ से कैश मिलेगा.
राजन कुमार, प्रबंधक लीड बैंक, गोपालगंज

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