आखिरी अध्याय में बारिश से मौसम हुआ सुहाना
बाजारों में दिखा सकारात्मक असर
गोपालगंज : रमजानुल मुबारक का अधिकतर अध्याय गुजर चुके हैं. संभवत: बुधवार या गुरुवार को ईद मनायी जायेगी. इस बीच पूरे एक माह रोजेदारों ने रब की इबादत में कोताही नहीं बरती. अब जबकि महज तीन या चार रोजे से पहले आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादल ने तमाम लोगों को राहत दी है. रोजेदारों के लिए तो मानों राहत रही है. कारण की तपती दोपहरी में रोजा रख कर खरीदारी करना किसी मुसीबत से कम नहीं. ऐसे में अल्लाह की ओर से बादल ने खरीदारों को बेइंतहा राहत दी. दिन भर रोजेदारों ने खरीदारी की. दुकानदार काफी खुश थे.
महिलाएं जहां सूट, नकाब, चूड़ी, चप्पल, रेडिमेड कपड़ों की जम कर खरीदारी की.
ईदी भेजने का सिलसिला शुरू : रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरे में अलविदा जुमा बीतने के साथ ही बहन-बेटियों के यहां ईदी भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है. मुसलिम समाज में सदियों से ईदी भेजने का रिवाज रहा है. बहन-बेटियों के साथ ही हाल में हुई शादी या फिर नये रिश्ते में ईदी भेजवाना आम है. उनकी पसंद का ख्याल रख कर कपड़े, जूते-चप्पल से लेकर अन्य सामग्री दिलवायी जाती है.
क्या हमें ईद पर कपड़ा नहीं मिलेगा : खाला मेरे अब्बू की तबीयत बहुत खराब है. रिक्शा नहीं चला पा रहे हैं. हम लोगों को खाने-पीने की काफी दिक्कत है. क्या इस बार ईद पर हम लोगों को नया कपड़ा नहीं मिल सकेगा. ये मासूम सवाल है मठिया निवासी 14 वर्षीया यासमीन के. ये सवाल सुन कर एहसास हुआ कि समाज में हमारे बीच बहुत से जरूरतमंद लोग मौजूद हैं, लेकिन गैरत ने उनका मुंह बंद कर रखा है. ऐसे में वो अपनी तकलीफ आखिर किससे बयां करें. तीन पुत्रियों व एक पुत्र के साथ इस रमजान में यासमीन के मां-बाप के लिए गुजर -बशर काफी मुश्किल साबित हो रहा है. इसलाम में सदका, जकात आदि का नियम खास तौर पर इन्हीं जरूरतमंदों के लिए ही बनाया गया था, लेकिन आज हम बस अपने परिवार के सुख-सुविधाओं ही केंद्रित हैं.
