बुधवार को चांद दिखा तो अगले दिन ईद

मसजिदों में पढ़ी गयी रमजान के आखिरी जुमे की नमाज अकीदमतमंदों ने एक – दूसरे से गले मिलकर मांगी दुआ गोपालगंज : माशाअल्लाह, अगर बुधवार को चांद दिखा तो अगले दिन ईद मनायी जायेगी. ईद की नमाज सात जुलाई को पढ़ी जायेगी. शुक्रवार को रमजान माह के अंतिम जुमा पर अलविदा की नमाज अदा की […]

मसजिदों में पढ़ी गयी रमजान के आखिरी जुमे की नमाज
अकीदमतमंदों ने एक – दूसरे से गले मिलकर मांगी दुआ
गोपालगंज : माशाअल्लाह, अगर बुधवार को चांद दिखा तो अगले दिन ईद मनायी जायेगी. ईद की नमाज सात जुलाई को पढ़ी जायेगी. शुक्रवार को रमजान माह के अंतिम जुमा पर अलविदा की नमाज अदा की गयी.
जामा मसजिद के इमाम शौकत फहमी ने बताया कि 29वें रोजं के दिन अगर चांद दिखा तो ईद छह जुलाई को होगी. चांद अगर छह जुलाई को दिखा तो सात जुलाई को ईद मनायी जायेगी. उन्होंने कहा कि मुकद्दस महीने में इस बार 29वें रमजान की शाम को इफ्तार के बाद ईद का चांद दिखायी दिया, तो उसी दिन रमजान हम सबके लिये एक साल के लिए विदा हो जायेगा. इसके अगले दिन गुरुवार को ईद मनायी जायेगी.
चार जुमा बीत गये हैं. इस बार सात जून से रमजान महीना शुरू हुआ था. उधर, मसजिदों में अलिवदा की नमाज अदा करने के बाद अकीदतमंदों ने एक – दूसरे से गले मिल कर खुशियां जाहिर कीं. साथ ही अल्लाह-तआला से अमन – चैन की दुआएं मांगी. उधर, मरकजी मसजिद के इमाम ने कहा कि खुदा की इबादत करनेवाले शख्स की जिम्मेदारी है कि वह खुद से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करे. जकात रमजान के अलावा बाकी दिनों में भी दिया जा सकता है. ऐसा जरूरी नहीं कि रमजान में ही जकात देना चाहिए.
इसलाम में जकात को फर्ज करार दिया गया है. जकात देने की हैसियत रखनेवाले को हर हाल में इसे अदा करना होगा. जकात देनेवाले के लिए कामयाबी के रास्ते खुलते हैं. रमजान का मुबारक महीना बरकतों का महीना है. इसमें खुदा खास नेमतें हैं. इसी वजह से जकात देनेवाले को एक की जगह 10 गुना ज्यादा सवाब मिलता है.
फितरा गरीब को ही देना चाहिए
दरगाह शरीफ के मौलाना ने अलविदा की नमाज अदा करने के बाद कहा कि रमजान में फितरे की रकम गरीबों को देनी चाहिए. अगर आपका रिश्तेदार, पड़ोसी गरीब हो, तो उसे भी इसकी रकम दे दें. सही मायने में फितरे की रकम पर गरीबों का ही हक है, ताकि वे ईद की खुशी में आपके साथ शरीक हो सकें. हदीश में इस बात का जिक्र है कि फितरा रोजेदारों की ढाल है.
अगर एक महीने तक रोजा रखने के दौरान कुछ कमी हो गयी, तो फितरा रोजेदारों के लिए रोजे की हिफाजत का काम करता है.
नहीं हुई मसजिदों के आसपास सफाई
रमजान को लेकर मसजिदों के इर्द-गिर्द सड़कों की सफाई नहीं करायी गयी. शुक्रवार को गंदगी के बीच गुजर कर नमाज पढ़ने को लोग मसजिदों में पहुंचे. नगर पर्षद की उदासीनता के कारण नमाजियों की परेशानी बढ़ गयी है. सबसे अधिक जंगलिया, स्थित मसजिद पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

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