गोपालगंज : बच्चे के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए मां का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है. मां के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है.
इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाये रखने के लिए छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए. ये बातें गोपालगंज सदर पीएचसी के डॉ हरेंद्र प्रसाद सिंह ने कही. वे कर्मियों को जानकारी दे रहे थे, ताकि वे इस बारे में महिलाओं को जागरूक करें.
उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है. बच्चे को छह माह तक लगातार केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय या भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के संपूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए संपूर्ण आहार के रूप में काम करता है.
उन्होंने बताया कि बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है. इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके मां का दूध पिलाते रहना चाहिए. मां का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है, लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है.
अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं, जो कि एक भ्रांति है. मां के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं, इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए. बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है.
शुरुआती स्तनपान होता है जरूरी
लेबर रूम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स यह सुनिश्चित कराएं कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां की छाती पर रखकर स्तनपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर ही करायी जाये. नवजात को मां का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है.
इसके अलावा मां को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और मां के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है, ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान मां के दूध से वंचित न रह जाये.
