घरवालों से दोबारा मिलने के लिए पहनें हेलमेट

पुलिस से बचने के लिए नहीं, घरवालों से दोबारा मिलने को पहनें हेलमेट गोपालगंज : शहर के आसपास अगर आप किसी को बिना हेलमेट वाले बाइक सवारों को रोककर उन्हें फ्री में हेलमेट गिफ्ट करते देखें तो हैरान मत होना. यह हकीकत है. बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, टैली, जीएसटी आदि पढ़ाने के बाद कंप्यूटर इंजीनियर […]

पुलिस से बचने के लिए नहीं, घरवालों से दोबारा मिलने को पहनें हेलमेट

गोपालगंज : शहर के आसपास अगर आप किसी को बिना हेलमेट वाले बाइक सवारों को रोककर उन्हें फ्री में हेलमेट गिफ्ट करते देखें तो हैरान मत होना. यह हकीकत है. बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, टैली, जीएसटी आदि पढ़ाने के बाद कंप्यूटर इंजीनियर शाहिद इमाम को बाइक सवारों को नसीहत देते देखे जा सकते हैं. लोग आमतौर पर अपने ड्यूटी खत्म होने के बाद घर पहुंचकर आराम फरमाना चाहते हैं या फिर अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ घूमना-फिरना पसंद करते हैं. शहर के आइटी केयर एंड आइटी एकेडमी के डायरेक्टर शाहिद इमाम और इनके भाई सद्दाम अपने ड्यूटी के बाद जो करते हैं, वो हम सब के लिए प्रेरणादायी है.
छात्र-छात्राओं को भी करते हैं जागरूक : इंस्टीट्यूट पर पहुंचे छात्रों को शाहिद इमाम उन्हें हेलमेट पहनने के फायदे और न पहने जाने के स्थिति में होने वाले खतरों के बारे में समझाते हैं. साथ ही वे लोगों को यह भी समझाते हैं कि पुलिस वाले उन्हें हेलमेट ट्नेने पर क्यों जोर देते हैं. अपने इस पहल के पीछे का कारण बताते हुए वो कहते हैं कि ‘हेलमेट पुलिस से बचने के लिए नहीं, बल्कि घर वालों से दुबारा मिलने के लिए पहनिये.
हर खास मौके पर बांटते हैं हेलमेट : शाहिद हर खास मौके पर अपना यह काम जारी रखते हैं. वे खासतौर पर त्योहारों जैसे कि रक्षाबंधन और भाई दूज के साथ सड़क सुरक्षा सप्ताह के समय हेलमेट का वितरण करते हैं. इन मौकों पर छात्राओं और बच्चों से बात कर उन्हें भी इस विषय पर जागरूक करने की कोशिश करते हैं.
90 फीसदी हेलमेट नहीं पहनने पर जाती है जान
शाहिद इमाम ने कहा कि अपनी नौकरी छोड़ने के बाद गोपालगंज आने पर यह पाया है कि बाइकरों के साथ होने वाले सड़क हादसे में 90 प्रतिशत मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं. सड़क सुरक्षा सप्ताह में प्रशासन भी ऐसे लोगों को जागरूक करता है. शाहिद अपने शॉप की बिल प्रति पर भी हेलमेट पहनने का स्लोगन कंप्यूटर सामग्री की खरीदारी करनेवाले ग्राहकों को देकर जागरूक कर रहे हैं.
कमाई का 20 फीसदी हेलमेट पर खर्च
यहां तक कि इस बार अपने शादी के सालगिरह पर भी 20 बाइक सवार को करीब 17 हजार के हेलमेट गिफ्ट किये. इन सब के अलावा शाहिद अपनी हर महीने की कमाई की लगभग 20 फीसदी रकम हेलमेट बांटने में खर्च कर देते हैं. जानकारी के मुताबिक पिछले दो साल में उन्होंने 127 से ज्यादा लोगों को हेलमेट बांटा है. इसी वजह से लोगों ने प्यार से उन्हें हेलमेट मैन और हेलमेट भाई भी बुलाना शुरू कर दिया है.
सराहनीय पहल
हेलमेट नहीं पहनने के कारण दुर्घटना होने पर अधिकतर लोगों की जान चली जाती है. इंजीनियर का जागरूकता अभियान सराहनीय पहल है. लोगों को जागरूक होने की जरूरत है.
अशोक कुमार चौधरी, सिविल सर्जन

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