उत्पाद विभाग ने की 5885 छापेमारी, 25.97 लाख रुपये का मिला राजस्व
70 बाइकों सहित सहित 127 वाहन भी हुए जब्त, चल रहा लगातार अभियान
अपराध, सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक कलह में आयी कमी
गोपालगंज : शराबबंदी के दो साल पूरे हो गये हैं. इन दो वर्षों में शराब के शौकीनों और धंधेबाजों के लुका-छिपी का खेल चलता रहा है. सुखद यह है कि शराबबंदी के बाद 90 फीसदी लोगों ने राहत की सांस ली है. वहीं, अपराध, सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक कलह में कमी आयी हैं. उधर, यह भी स्पष्ट है कि 10 फीसदी लोग शराब पीने और शराब के धंधे में लगे रहे हैं. उत्पाद विभाग के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि शराबबंदी के सख्त कानून के बाद भी जिले में शराब का कारोबार होते रहा है,
जो अब भी जारी है. दो सालों के आंकड़ों पर गौर करें, तो उत्पाद विभाग ने 5885 छापेमारी में की, जिसमें 42 करोड़ से अधिक रुपये का शराब बरामद की गयी. इस अभियान के तहत 1245 लोगों को जेल भेजा गया. वहीं, छोटे-बड़े कुल 127 वाहन भी विभाग ने जब्त किया. इस दौरान सरकार को 25.97 लाख रुपये का राजस्व भी मिला है. इसके अलावा पुलिस ने भी शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया.
अभियान पर नजर डालें तो वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में शराब कारोबार में इजाफा हुआ है. इसका गवाह खुद उत्पाद विभाग का आंकड़ा है. सवाल उठता है कि क्या शराबबंदी के दूसरे वर्ष में कानून कमजोर पड़ गया या शराब कारोबारी निरंकुश हो गये. शराबबंदी को सबने सराहा है. ऐसे में जरूरत है कि इस कारोबार और कारोबारियों पर पूरी तरह अंकुश लग जाये. हालांकि आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि विभाग सक्रिय रहा.
एक नजर में छापेमारी और बरामदगी
कुल छापेमारी 5885
कुल गिरफ्तारी 1245
जब्त अंग्रेजी शराब 65825.925 लीटर
अन्य शराब जब्त 12692.837 लीटर
जब्त बाइक 70
अन्य बड़े वाहन 57
जब्त शराब की अनुमानित कीमत 42.5 करोड़ रुपये
कुल प्राप्त राजस्व 25,97844 रुपये
(नोट: आंकड़े एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2018 तक के हैं.)
क्या कहते हैं अधिकारी
शराब के धंधे पर पूर्णत: विराम लगाने के लिए लगातार छापेमारी अभियान जारी है. इस पर अंकुश भी लगा है. कोई चोरी-छिपे यदि धंधा करता है, तो वह हर हाल में पकड़ा जायेगा.
प्रियरंजन, उत्पाद अधीक्षक, गोपालगंज
