गोपालगंज : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है. ब्लड बैंक में महज दो यूनिट रक्त का संग्रहण है. भगवान न करे ऐसी परिस्थिति में कोई हादसा हो. अगर कोई बड़ा हादसा हो गया तो उनकी जान कैसे बचायी जायेगी. सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून स्टॉक में नहीं है. हर रोज इमरजेंसी मरीजों की जान बचाने के लिए औसतन आठ से 10 यूनिट ब्लड की जरूरत है. ब्लड बैंक में महज दो यूनिट पहले से ब्लड मौजूद है.
ब्लड बैंक में नहीं होगा खून तो कैसे बचेगी जिंदगी
गोपालगंज : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है. ब्लड बैंक में महज दो यूनिट रक्त का संग्रहण है. भगवान न करे ऐसी परिस्थिति में कोई हादसा हो. अगर कोई बड़ा हादसा हो गया तो उनकी जान कैसे बचायी जायेगी. सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून […]

रेडक्रॉस सोसाइटी भी गंभीर नहीं : रेडक्रॉस सोसाइटी के अंतर्गत सदर अस्पताल का ब्लड बैंक संचालित है. ब्लड बैंक में हर वक्त ब्लड स्टॉक रहे, इसकी जिम्मेदारी रेडक्रॉस को है. लेकिन गोपालगंज रेडक्रॉस सोसाइटी को इसकी चिंता नहीं है. हाल में रेडक्रॉस के सदस्यों ने किसी तरह का कैंप भी नहीं लगाया.
सीवान से मिला 20 यूनिट ब्लड
सदर अस्पताल में ब्लड नहीं रहने पर सीवान से मंगानी पड़ी. सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार चौधरी की पहल पर सीवान रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव ने 20 यूनिट ब्लड दिया. सीवान ब्लड बैंक से मिले 20 यूनिट ब्लड के बाद गोपालगंज ब्लड बैंक में 22 यूनिट होने की बात बतायी जा रही है.
हर रोज आठ से दस यूनिट खून की है जरूरत
काम करती हैं तीन ब्लड संग्रहण संस्थाएं
असहाय मरीजों की जान बचाने के लिए नि:शुल्क रक्तदान करनेवाली तीन स्वयंसेवी संस्थाएं जिले में काम कर रही हैं. इनमें क्रमश: बिहार ब्लड डोनर टीम (बीबीडीटी), जिला ब्लड डोनर टीम (डीबीडीटी) तथा मीडिया हाउस ब्लड डोनेशन टीमें हैं. अब तक इस टीम ने ब्लड बैंक में रक्त की कमी को दूर नहीं किया.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
ब्लड बैंक में रक्त की कमी को सभी को मिलकर दूर करनी होगी. ब्लड बैंक चलाने के लिए सीमावर्ती जिलों से सीख लेनी चाहिए. ब्लड स्टॉक नहीं रहने पर बैंक कैसे चलेगा.
डॉ अशोक कुमार चौधरी, सीएस, गोपालगंज.