पहले बाजार में बेचा 10 किलो धान, फिर खरीदा था जहर
भोरे : एक मां जो बच्चों को अपने कलेजे का टुकड़ा मानती है. वह इतना बड़ा कदम कैसे उठा ली. इसके पीछे का कारण क्या रहा होगा, यह तो खुलासा होना बाकी है. लेकिन, जो घटना भोरे के तिलक डूमर में हुई है, वह निश्चित तौर पर मां शब्द को कलंकित कर रहा है. आज […]
भोरे : एक मां जो बच्चों को अपने कलेजे का टुकड़ा मानती है. वह इतना बड़ा कदम कैसे उठा ली. इसके पीछे का कारण क्या रहा होगा, यह तो खुलासा होना बाकी है. लेकिन, जो घटना भोरे के तिलक डूमर में हुई है, वह निश्चित तौर पर मां शब्द को कलंकित कर रहा है. आज दुनिया की हर एक मां जिसने भी इस घटना के बारे में सुना और जाना, वह उसे कोस रही है. आज जो सच हमारे सामने आया, वह काफी चौंकाने वाला था. रविवार को ममता ने घर में रखे 10 किलो धान लेकर उसे बाजार में बेची.
उससे मिले पैसों से वह भोरे जाकर कीटनाशक खरीद ली. घर आने के बाद ऐसे समय का इंतजार करने लगी, जब घर में कोई न हो. शाम के वक्त जब सभी लोग बाजार और महिलाएं खेतों में काम करने गये तो ममता अपने तीनों बच्चों को लेकर पास ही स्थित स्याही नदी के किनारे एक बगीचे में चली गयी. वहां पानी में कीटनाशक घोलकर उसने तीनों बच्चों को पिला दिया. कीटनाशक देने के बाद फिर बच्चों को लेकर वह घर चली आयी और कमरे में बच्चों को बंद कर उनके मरने का इंतजार करने लगी.
पड़ोसियों को शक हुआ तो उन्होंने शोर मचाना शुरू किया. मौके पर जुटे ग्रामीणों ने दरवाजे को तोड़कर किसी तरह तीनों बच्चों को बाहर निकाला और रेफरल अस्पताल ले आये. यहां एक बच्चे की मौत हो गयी. डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए बच्चों को सदर अस्पताल गोपालगंज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया. घटना की जानकारी जब अन्य लोगों को हुई तो आक्रोशित लोगों ने ममता की पिटाई कर दी. पुलिस ने ममता को गिरफ्तार कर लिया है.
चोरी की शिकायत पर बच्चे की पिटाई से गुस्से में थी ममता : रणविजय भोरे के महात्मा गांधी स्कूल का छात्र था, जबकि दिग्विजय और शिवांगी गांव के ही स्कूल में पढ़ते थे. दो दिन पहले रणविजय ने अपने चाचा हजारी भगत, जिनकी दुकान महरादेऊर बाजार में है वहां से दो हजार रुपये की चोरी कर ली.
जब इस बात की जानकारी शारदानंद भगत को हुई तो उन्होंने रणविजय की पिटाई कर दी. बच्चे की पिटाई से भड़की ममता की शारदानंद से कहासुनी हो गयी. इसके बाद ममता अपने तीनों बच्चों को लेकर अलग रहने का फैसला किया. दो दिनों से चल रहे इस तनाव के माहौल में ममता को घुटन महसूस हो रही थी. फिर ममता ने जो फैसला लिया उससे तीन जिंदगियां समाप्त हो गयीं.
पहला बेटे की सांप काटने से हुई थी मौत
बात 10 साल पहले से शुरू करते हैं. तिलक डूमर गांव निवासी शारदानंद भगत की पहली शादी कुसुमावती देवी के साथ हुई थी. कुसुमावती देवी भी मां बनी, उसे भी तीन बच्चे हुए. इसमें बड़ी बेटी डेजी, दूसरी निक्कू और आखिर में एक बेटा हुआ. उसका नाम आमोद था. बेटे का सुख शारदानंद के जीवन में शायद नहीं लिखा था.
12 वर्ष पूर्व उसका बेटा आमोद जब नौ साल का था तो उसे सांप ने डस लिया था. इससे उसकी मौत हो गयी. वंश चलाने के लिए कुसुमावती ने अपनी ही ममेरी बहन ममता के साथ शादी करा दी. ममता कटेया थाने के इंद्रपट्टी गांव की रहने वाली थी. फिर ममता को मां का सुख मिला. ममता ने रणविजय, दिग्विजय और शिवांगी को जन्म दिया. बच्चे बड़े हुए स्कूल भी जाने लगे. शारदानंद भगत को संतान सुख की प्राप्ति तो हुई, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.
संतान सुख के लिए अपने से कम उम्र की लड़की के साथ शादी करने वाले शारदानंद को आखिरकार संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो सकी.