अब तक चार घटनाएं हुईं, जिसमें मां ने ही ली बच्चों की जान
भोरे : भोरे थाने के तिलक डूमर गांव में हुई घटना ने मां की ममता को कलंकित तो किया ही साथ ही कई ऐसे सवाल भी खड़े कर दिये हैं जिसके जवाब अब इस समाज को तलाशने होंगे. भोरे में ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें मां अपने ही बच्चों के साथ खुद अपने जीवन को समाप्त कर ली. लेकिन, ऐसी घटना कभी नहीं हुई, जिसमें एक मां ने अपने ही हाथों अपने बच्चों की जान ली हो और खुद जिंदा बच गयी हो. बता दें कि वर्ष 2009 में भोरे थाने के देऊरवां गांव में पारिवारिक कलह के कारण एक महिला ने अपने दो बच्चों के साथ खुद को जिंदा जला दिया था, जिसमें तीनों की मौत हो गयी थी.
इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण उस समय भोरे थाने के तत्कालीन थानेदार को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया था. दूसरी घटना भोरे थाने के कुकुरभुंका गांव में हुई थी, जहां पारिवारिक विवाद को लेकर एक पत्नी ने अपने पति और बच्चे पर कातिलाना हमला किया था. इस हमले में बच्चे की मौत हो गयी थी, जबकि पति बच गया था. बाद में पत्नी ने खुद भी आत्महत्या कर ली थी. तीसरी घटना देऊरवां गांव में ही हुई थी,
जहां आग लगने के कारण एक महिला और उसके दो बच्चों की मौत हो गयी थी. हालांकि यह बात आज तक साफ नहीं हो पायी कि महिला ने खुद ही अपने कमरे में आग लगायी थी या फिर यह एक हादसा था. चौथी घटना भोरे थाने के कोरेयां गांव में हुई थी, जहां फौजी शिवशंकर यादव की पत्नी इसलिए नाराज हो गयी थी कि फौजी उसे अपने साथ लेकर नहीं जा रहा था. नाराज पत्नी ने अपने तीन मासूम बच्चों को साथ लेकर अपने शरीर में आग लगा ली थी, जिसमें पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गयी थी.
जबकि एक बच्ची बाल-बाल बच गयी थी. इस घटना को लेकर जिंदा बची बच्ची ने ही पूरे मामले का खुलासा किया था. इसके बाद बनकटा मल में पिछले वर्ष 24 फरवरी को विमलावती देवी नाम की महिला ने अपने दो बच्चों के साथ सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली थी. इस घटना का कारण भी पारिवारिक विवाद ही सामने आया. फिर रविवार की देर शाम ममता ने अपने ही तीन बच्चों को जहर दे दिया, जिससे बच्चों की मौत हो गयी. इन घटनाओं से एक बात तो साफ है कि पारिवारिक कलह के कारण बच्चे ही अपनी जान गंवाते हैं.
