वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हो उठा जमुनहा
पंचदेवरी : यज्ञ करना सभी कर्मों में श्रेष्ठ है, लेकिन इसके लिए श्रद्धा और विश्वास का समागम होना चाहिए. इसके बिना यज्ञ सफल नहीं होता है. यज्ञ तब अपनी सफलता को प्राप्त करता है, जब आचार्य में विश्वास और यजमान में श्रद्धा होती है. उक्त बातें स्थानीय प्रखंड के जमुनहा बाजार में 20 फरवरी से चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में भगवान श्रीराम की नागरी अयोध्या से पधारे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक श्री राघव दास जी महाराज ने कहीं. यज्ञ के अंतिम दिन स्रोताओं ने भाव-विभोर होकर उनकी संगीतमयी कथा का आनंद उठाया. भक्ति रस से भरी उनकी गीतों पर श्रोता झूम उठे. अपनी कथा की अमृत वर्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जब यज्ञ सफल होता है
तो भगवान प्रसन्न होते हैं तथा अनंत शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है और भगवान के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है. अपनी कथा का रसपान कराते हुए श्री राघव दास जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव विश्वास के प्रतिरूप हैं तो माता पार्वती श्रद्धा की. इन दोनों के समागम से श्रीराम कथा की उत्पत्ति हुई, जिसके श्रवण से भक्तों को दुर्लभ फल की प्राप्ति होती है.
हर-हर महादेव से गूंज उठा पंडाल, यज्ञ को दी गयी पूर्णाहुति :
बुधवार को यज्ञ का अंतिम दिन था. यज्ञ में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. हर-हर महादेव के नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा.देव नगरी काशी से पधारे विद्वानों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ को पूर्णाहुति दी गयी. चारों तरफ आस्था का अद्भुत नजारा दिख रहा था. अंतिम दिन परिक्रमा करने, प्रवचन सुनने के साथ प्रसाद ग्रहण के लिए भक्तों की काफी भीड़ जमा थी. भगवान शिव के दिव्य दर्शन के लिए काफी दूर-दूर से भक्त मंदिर परिसर में पहुंचे थे.
जमुनहा स्थित श्रीराम जानकी वैष्णो मठ के महंत संत शिरोमणि श्री हरिनारायण दास जी महाराज ने बताया कि भगवान शिव की असीम कृपा से यज्ञ पूर्णतः सफल रहा है. इसमें पूर्व मुखिया उपेंद्र मिश्र, युवा जदयू के अध्यक्ष मुन्ना मिश्र, जदयू के प्रखंड अध्यक्ष अशोक गुप्ता, जयराम गुप्ता, नंदकिशोर तिवारी सहित क्षेत्र के सभी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
गायत्री शक्तिपीठ की वर्षगांठ पर दीप यज्ञ आयोजित
सिधवलिया. परिवार रूपी टकसाल से ही महामानवों का निर्माण होता है. भारत की परिवार व्यवस्था विश्व में अपनी पहचान रखता है. यह ऋषियों द्वारा बनायी गयी व्यवस्था है. उक्त बातें प्रखंड के बुधसी में अवस्थित गायत्री शक्तिपीठ की 16वीं वर्षगांठ पर आयोजित दीप यज्ञ में शांतिकुंज हरिद्वार से आये आचार्य धीरेंद्र जी द्वारा कही गयी. मौके पर उन्होंने नारी जागरण पर बोलते हुए कहा कि भारत में नारी को देवी का प्रतिरूप माना जाता है.
स्वयं इस धरती को हम मां कह कर पुकारते हैं. यही कारण है कि भारत की सभ्यता संस्कृति सभी देशों से उच्च है. उन्होंने परिवार निर्माण एवं नारी जागरण पर युग ऋषि के संदेशों को सुनाया. मौके पर गायत्री परिवार के मोहन साह बैरिस्टर प्रसाद हरेंद्र गुप्ता, सतेंद्र सिंह, मोहन पांडेय आदि मौजूद थे.
