बच्चों, बुजुर्गों व बीमारों को सतर्कता बरतने की जरूरत
गोपालगंज : ठंड अब मुसीबत बनने लगी है. ऐसे में जरा सी लापरवाही भारी पड़ रही है. खासतौर पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, सांस रोग व गठिया के मरीजों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है. सदर अस्पताल में 360 मरीज पहुंचे. विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो हर उम्र के लोगों को इस मौसम में सावधान रहना चाहिए. लेकिन, बच्चों, बुजुर्ग व बीमारों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए. वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ शंभुनाथ सिंह के मुताबिक, अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच घट रहे अंतर का असर अब साफ दिखने लगा है.
खासतौर पर उच्च रक्तचाप, हृदय व सांस के मरीजों की मुसीबत बढ़ने लगी है. अत्यधिक ठंड की वजह से मांसपेशियां और नसें सिकुड़ जाती हैं. यह परिस्थिति हृदय और मस्तिष्क रोग को दावत देने वाली है. जो इन रोगों के मरीज हैं, उनके लिए स्थिति और भी दिक्कत देने वाली है. ब्लड प्रेशर संतुलन बिगड़ रहा है तो सामान्य तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं भी बेअसर हो जा रही हैं. ऐसे में हार्ट स्ट्रोक और ब्रेन स्ट्रोक की समस्या काफी बढ़ गयी है.
ऐसा लें आहार : इस मौसम में खारा, मधुर व रस प्रधान आहार लेना चाहिए. पचने में भारी, पौष्टिकता से भरपूर, गरम और स्निग्ध प्रकृति के घी से बने पदार्थों का सेवन करना चाहिए. इस मौसम में पहले से ही शरीर में कफ जमा होने लगता है, इसलिए कफ बढ़ाने वाली ठंडी वस्तुओं से परहेज करना चाहिए. गुड़, तिल का प्रयोग लाभदायक है. अन्न में गेहूं, नया चावल, ज्वार, उड़द, मूंग. कंद मूल में सूरन, गाजर, शकरकंद, आलू. फल में अंगूर, अखरोट, खजूर, छुहारा, सेब, अमरूद, मुनक्का, नारियल, संतरा, चीकू, बेर, अनन्नास आदि. साथ ही दही, घी, दूध, मक्खन, पनीर, चीज, मलाई, छाछ, छेना के साथ मिठाई, शक्कर, लौंग, बादाम, पिस्ता व काजू को सेवन करना चाहिए. बकरे व मुर्गा का मीट, मछली का सेवन लाभदायक है. इस मौसम में हल्के गर्म जल का प्रयोग करना चाहिए.
इनसे करें परहेज : पुराना चावल, बाजरा, जौ, सत्तू, पुराना अनाज, मसूर दाल, चना, मटर, कुल्थी, करेला, सोआ, अरबी, सहजन, बैगन, मेथी बीज, मूली, सिंघाड़ा, कमल कंद, केला, सीताफल, जामुन, पपीता, डिब्बा बंद फल, सूखा मांस, भुना हुआ मांस, छोटी मछली व शीतल जल.
