खुफिया एजेंसियां इसकी संभावना खंगालने में जुटी
आखिर कौन लोग करते थे वायरलेस सेट का उपयोग
गोपालगंज : बरौली से मिले वायरलेस सेट के हाई फ्रीक्वेंसी होने का खुलासा होते ही इसके लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्शन से इन्कार नहीं किया जा सकता है. सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़ा हो गये हैं. देश की खुफिया एजेंसियां इसकी संभावना को खंगालने में जुट गयी है. बरौली के धमही नदी के किनारे सिसई गांव के पास से लावारिस स्थिति में बरामद किये गये वायरलेस सेट का उपयोग कौन कर रहा था. एक साथ छह वायरलेस सेट चालू स्थिति में मिलते ही पुलिस के होश उड़ गये हैं.
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वायरलेस सेट दो-तीन साल पुराना है. हैरत इस बात का भी है कि बिना टावर के ही इसकी हाई फ्रीक्वेंसी 15 से 20 किमी है. वायरलेस सेट के हाई फ्रीक्वेंसी भी इसका कनेक्शन लश्कर से जोड़ रहा है. वायरलेस सेट तब बरामद हुआ है, जब जिले में एनआईए की टीम अब शेख अब्दुल नईम के सोहैल बन कर गोपालगंज में दो वर्षों तक तैयार किये गये नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है. इस दौरान एनआईए की टीम ने लगभग 30 लोगों से पूछताछ कर चुकी है. संभावना यह भी है कि एनआईए की टीम कहीं इन तक न पहुंच जाये इसलिए वायरलेस सेट को नदी के किनारे लाकर फेंक दिया गया, ताकि नदी के इस क्षेत्र में कोई देखे नहीं और मामला खत्म हो जाये. इस बीच सोमवार को दोपहर सिसई गांव के कुछ युवकों ने वायरलेस सेट देखकर पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस रेलवे का वॉकी-टॉकी समझ कर जब्त की. लेकिन जांच शुरू की गयी, तो पुलिस के होश उड़ गये.
फोरेंसिक लैब से मिलेगा फिंगर प्रिंट
वायरलेस सेट पर फेंकने वाले की अंगुलियों की प्रिंट की जांच की जा रही है.
इसके लिए सेट को फोरेंसिक लैब भेजने की तैयारी चल रही है. फिंगर प्रिंट के जरिये कुछ खुलासा होने की संभावना है. वैसे तो सुरक्षा एजेंसियां पल-पल की स्थिति की जांच में जुटी है. सूत्रों का मानना है कि शहर में रह कर सोहैल खान अकेले धन्नु राजा को ही नहीं, बल्कि अन्य कई लोगों को अपने संगठन से जोड़ चुका है. अगर वायरलेस सेट का कनेक्शन लश्कर से जुड़ा है, तो कई लोगों के इस संगठन से जुड़ने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता.
