कारागार से बदमाश चला रहे ''सरकार''

चिंता. हर छापेमारी में मिलते हैं मोबाइल और आपत्तिजनक सामान जेल ब्रेक के मद्देनजर गृह मंत्रालय अलर्ट कर चुका है. जेल के अंदर सबकुछ ठीकठाक नहीं है. बंदी अपराधिक घटनाओं की पृष्टभूमि तैयार कर रहे हैं. गोपालगंज : बिहार के सबसे हाईटेक और सुविधाजनक जेलों में गोपालगंज जेल शामिल है. यहां की सुविधाओं के बीच […]

चिंता. हर छापेमारी में मिलते हैं मोबाइल और आपत्तिजनक सामान

जेल ब्रेक के मद्देनजर गृह मंत्रालय अलर्ट कर चुका है. जेल के अंदर सबकुछ ठीकठाक नहीं है. बंदी अपराधिक घटनाओं की पृष्टभूमि तैयार कर रहे हैं.
गोपालगंज : बिहार के सबसे हाईटेक और सुविधाजनक जेलों में गोपालगंज जेल शामिल है. यहां की सुविधाओं के बीच कैदियों के पास आसानी से मोबाइल व अन्य आपत्तिजनक सामान उपलब्ध हो रहे हैं. जेल के अंदर अपराधी साजिश रच रहे हैं. जेल से ही गैंग का संचालन किया जा रहा है. जेल में जब भी छापेमारी होती है, तो आपत्तिजनक सामग्री बरामद होती है. उसके बाद फिर से जेल के अंदर आपत्तिजनक सामान पहुंच जाता है. आखिर जेल के अंदर कैसे आपत्तिजनक सामान पहुंच रहा है.
यह चिंता का विषय बना हुआ है. जेल के अंदर माओवादी संगठन के हार्डकोर 19 कैदी बंद हैं. इनके अलावा कई कुख्यात अपराधी बिहार और यूपी के हैं, जो जेल में प्राप्त सुविधाओं की बदौलत पुलिस की नींद हराम किये हुए हैं. जानकार सूत्रों की मानें, तो जेल के अंदर बड़े अपराधियों के पास वह हर सुविधा उपलब्ध है जैसा वह चाहते हैं. समय-समय पर जेल प्रशासन और जिला प्रशासन छापेमारी और तलाशी करते रहा है. हर छापेमारी में आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ है.
जेल ब्रेक की घटना सामने आने के बाद खुफिया विभाग ने जेल की सुरक्षा को लेकर चिंता जतायी है जिसमें जेल के दो टावरों की जगह चारों टावरों से निगरानी करने तथा जेल के अंदर एक और दीवार बनाने का सुझाव भी सरकार को दिया है. जेल के बाहर के सीसीटीवी को लेकर भी सुझाव दिये गये हैं. खुफिया रिपोर्ट के बाद गृह विभाग सरकार को अलर्ट कर चुका है. जेल में सुरक्षा बल की कमी को लेकर भी गंभीरता जतायी गयी है.
जेल की बढ़ायी गयी निगरानी
खुफिया अलर्ट को देखते हुए जेल प्रशासन निगरानी बढ़ा दी है. आनेवाले मुलाकातियों पर भी नजर रखी जा रही है. जेल प्रशासन पहले से ही अलर्ट था. जेल अधीक्षक संदीप कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि जेल की सुरक्षा में किसी तरह की कोई कमी नहीं है. जेल प्रशासन सुरक्षा के हर बिंदु पर अलर्ट है. कहीं किसी तरह की कोई कमी नहीं है.
केस स्टडी एक : एक मई को पं चंपारण के मंगलपुर गांव के गोविंदा चौधरी गिनती के दौरान गायब पाया गया. उसे देर शाम जेल के शौचालय के चैंबर में छिपा हुआ पकड़ा गया. उसने जो खुलासा किया उसके बाद जेल ब्रेक की योजना का भंडाफोड़ हुआ. इस घटना में बैकुंठपुर थाने के धर्मवारी गांव के बसंत कुमार, हुसैन, बिट्टु कुमार सिंह तथा गोविंदा के विरुद्ध थावे थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. इस मामले में कक्षपाल परमानंद पांजा तथा बैकुंठपुर सिरसा टोला सर्वोदय के प्रिंस कुमार को भी अभियुक्त बनाया गया.
केस स्टडी दो : चार अक्तूबर को माओवादी संगठन से जुड़े माओवादी कैदियों ने जेल के अस्पताल के नाले में सुरंग बना कर जेल ब्रेक की घटना को अंजाम देने की तैयारी की थी. सही समय पर जेल अधीक्षक संदीप कुमार को जानकारी मिल गयी और जेल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल ब्रेक की घटना को होने से रोक लिया. थावे थाने में कांड संख्या 144/17 दर्ज कर बैकुंठपुर थाना कांड संख्या 175/13 के अभियुक्त सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर थाने के सुपहीगढ़ के रहनेवाले मुकेश पटेल उर्फ विकास, मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र भटवलिया गांव के रहनेवाले रमेश पासवान, सारण जिले के पानापुर थाने के गृत भगवान गांव के शेखर बिन, गजेंद्र रावत, वैशाली जिले के फाफन बुजुर्ग गांव के राेहित सहनी, मीरगंज थाना क्षेत्र के माधो मटिहानी गांव के विशाल सिंह, उचकागांव थाना क्षेत्र के बालाहाता के शंभु सिंह को नामजद किया गया.

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