पति की मौत के बाद घर में नहीं है कमाऊ सदस्य
मांझा : धनकर गांव का एक गरीब परिवार इन दिनों दर-दर की ठोकर खा रहा है. इनकी सहायता करनेवाला कोई नहीं है. परिवार के एक लड़के को ब्रेन ट्यूमर है, जिसका इलाज कराने की क्षमता नहीं है और किसी तरह की सहायता भी नहीं मिल रही है. यह कहानी है स्व मंसूर आलम के परिवार की. मंसूर राजमिस्त्री का काम करते थे. 25 जून, 2013 को जिला मुख्यालय स्थित एक घर में काम करने के दौरान करेंट लगने से इनकी मौत हो गयी. ये परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे.
उस समय से लेकर अभी तक इनकी पत्नी अफसाना खातून मेहनत-मजदूरी कर अपने दो पुत्रों व एक पुत्री का पालन-पोषण करती हैं. काम नहीं मिलने पर भीख मांग कर दो वक्त की रोटी का किसी तरह जुगाड़ करती हैं. बड़े पुत्र जिशान राजा को ब्रेन ट्यूमर है, जिसका इलाज कराने में लाखों रुपये की आवश्यकता है. इलाज के लिए पैसे नहीं हैं और कोई सहायता भी नहीं कर रहा है. जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी सहायता करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. ऐसी स्थिति में पूरा परिवार दुखी है .गरीबी रेखा से नीचे बसर करनेवाली महिला अपने बाल-बच्चों का पालन-पोषण व इलाज कैसे करे यही सोच कर वह परेशान है.
