स्पीडी ट्रायल की ''स्पीड'' पर लगा ब्रेक

गोपालगंज : सरकार के अति महत्वपूर्ण निर्णय में स्पीडी ट्रायल भी शामिल है. गोपालगंज कोर्ट में स्पीडी ट्रायल की ‘स्पीड’ पर ब्रेक लग गया है, जिससे न्याय बाधित हो रहा है. पीड़ित पक्ष वर्षों मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. वैसे तो वर्ष 2013 से ही स्पीडी ट्रायल में जंग लगी हुई […]

गोपालगंज : सरकार के अति महत्वपूर्ण निर्णय में स्पीडी ट्रायल भी शामिल है. गोपालगंज कोर्ट में स्पीडी ट्रायल की ‘स्पीड’ पर ब्रेक लग गया है, जिससे न्याय बाधित हो रहा है. पीड़ित पक्ष वर्षों मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. वैसे तो वर्ष 2013 से ही स्पीडी ट्रायल में जंग लगी हुई है. तेजी से मुकदमों की सुनवाई नहीं होने के पीछे कई कोर्टों में मजिस्ट्रेट का नहीं होना है. पुलिस भी स्पीडी ट्रायल के मामलों में साक्ष्य उपलब्ध कराने में विलंब कर रही है. इसको लेकर अब जिला प्रशासन गंभीर हो गया है.

इस बार 37 संगीन अपराधों से जुड़े कांडों में स्पीडी ट्रायल चलाने का निर्णय लेते हुए जिला प्रशासन ने इसकी सूची न्यायालय को सौंपी है. साथ ही लक्ष्य रखा गया है कि नवंबर तक इसे हर हाल में पूरा किया जाये. कोर्ट में जल्दी-जल्दी मुकदमों में तिथि डाल कर सुनवाई करनी है, जिसमें कई कोर्ट खाली चल रहे हैं. दुर्गापूजा के बाद इस स्पीडी ट्रायल के मामलों में सुनवाई तेज होने की संभावना है. जानकर सूत्रों का कहना है कि स्पीडी ट्रायल के तहत मुकदमों के निर्णय नहीं होने के कारण एक बार फिर से अपराधी सिर उठा रहे हैं.

स्पीडी ट्रायल से काफी हद तक शुरुआती दिनों में अपराध पर शिकंजा कसा गया था. अपराधी स्पीडी ट्रायल के कारण अपराध करने से परहेज करने लगे थे. जैसे-जैसे इसकी स्पीड पर जंग लगती गयी, वैसे-वैसे अपराधियों का मनोबल भी बढ़ता जा रहा है.

क्या है स्पीडी ट्रायल : स्पीडी ट्रायल की शुरुआत 2007 में बिहार सरकार ने अपराध पर शिकंजा कसने के लिए की थी, जिसमें वैसा कोई भी अपराध जो जघन्य हो. हत्या, लूट, अपहरण, दंगा जैसे कांडों में पुलिस ने संगीन अपराध को ध्यान में रखते हुए थानावार मुकदमों का चयन कर अभियोजन की बैठक में निर्णय लेते हुए सूची तैयार कर कोर्ट को सौंपती है. कोर्ट इस कांड को प्राथमिकता के आधार पर प्रतिदिन सुनवाई कर जल्द-से-जल्द फैसला देता है. कोर्ट का फैसला जल्दी आने से पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय मिलता है.
कोर्ट में साक्ष्य के लिए तैनात हैं स्पेशल इंस्पेक्टर : स्पीडी ट्रायल की सुनवाई में व्यवधान न हो इसके लिए कोर्ट में स्पेशल इंस्पेक्टर की तैनाती की गयी है, जिनको स्पीडी ट्रायल के कांड के साक्षी, गवाह को घर से बुलाने तथा उन्हें घर तक पहुंचाने की जवाबदेही है, फिर भी स्पीडी ट्रायल के मामलों में सुस्ती से न सिर्फ प्रशासन बल्कि कोर्ट भी नाराज है.
डीएम ने की अभियोजन की समीक्षा : स्पीडी ट्रायल के मामलों की समीक्षा करते हुए डीएम ने सूचीबद्ध कांडों में नवंबर तक हर हाल में सुनवाई पूरी करने का निर्देश अभियोजन पक्ष को दिया है, जिसमें लोक अभियोजक की तरफ से बताया गया है कि 27 मामलों में लगभग साक्ष्य को उपलब्ध कराया गया है. इन मामलों में जल्द ही सुनवाई पूरी हो जायेगी. कई कोर्ट खाली होने के कारण स्पीडी ट्रायल में समस्या उत्पन्न हो गयी है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >