हाईकोर्ट का आदेश लेकर थाना पहुंचा पीड़ित, भगाया

गोपालगंज : पटना हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम ने शराब तस्करी के आरोप में जब्त की गयी स्कॉर्पियो को मुक्त करने का आदेश नगर थाने को दिया था. आदेश की कॉपी लेकर पीड़ित जब नगर थाना पहुंचा तो उसे भगा दिया गया. पुलिस अधिकारी ने कहा कि शराब के साथ पकड़ा गया है. कहियो छूटनेवाला […]

गोपालगंज : पटना हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम ने शराब तस्करी के आरोप में जब्त की गयी स्कॉर्पियो को मुक्त करने का आदेश नगर थाने को दिया था. आदेश की कॉपी लेकर पीड़ित जब नगर थाना पहुंचा तो उसे भगा दिया गया. पुलिस अधिकारी ने कहा कि शराब के साथ पकड़ा गया है. कहियो छूटनेवाला नहीं है.

पीड़ित ने डीएम से मिल कर न्याय की अपील की. पूरा मामला राजीवनगर के रहनेवाले राजद नेता सुजीत कुमार शुक्ला का है. सुजीत शुक्ला को नगर थाने की पुलिस ने 17 दिसंबर, 2016 को स्कॉर्पियो के साथ अरार मोड़ से गिरफ्तार किया था. आरोप था कि स्कॉर्पियो में शराब लेकर तस्करी की जा रही थी. पुलिस ने कई दिनों तक कस्टडी में रखा. जब परिजनों ने सीजेएम कोर्ट में आवेदन दिया तब सुजीत शुक्ला को 22 दिसंबर को जेल भेजा गया.

इस मामले में उसने खुद को बेकसूर बताते हुए पुलिस अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगा कर सुजीत शुक्ला कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया. इस मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद उसने पटना हाईकोर्ट में सीआरडब्ल्यूजेसी नंबर 1018/17 दाखिल किया जिसमें 23 अगस्त को हाईकोर्ट ने जब्त स्कॉर्पियो को मुक्त करने का आदेश दिया.

हाईकोर्ट के आदेश पर सुनवाई करते हुए डीएम ने छह जुलाई, 2017 को नगर थाने से स्कॉर्पियो को मुक्त करने का आदेश दिया. जब कॉपी लेकर वह थाना पहुंचा तो उसे भगा दिया गया. डीएम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी से तत्काल कार्रवाई करने को कहा है.

थावे के थानाध्यक्ष से कोर्ट ने किया शोकॉज : गोपालगंज. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी प्रतीक आनंद द्विवेदी के कोर्ट ने थावे के थानाध्यक्ष से शोकॉज किया है. कोर्ट ने कहा है कि न्यायालय में लंबित वाद सी 837/12 ट्रायल नंबर 131/17 दीनदयाल भगत बनाम रामनगीना मिश्र के नामांकित अभियुक्त थावे थाने के रामचंद्रपुर गांव के विश्वनाथ मिश्र के पुत्र रामदर्शन मिश्र के विरुद्ध न्यायालय द्वारा 14 जून, 2017 को अजमानतीय अधिपत्र व प्रोसेस 82 द.प्र.स. निर्गत किया गया था.
अबतक थानाध्यक्ष द्वारा उक्त अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं किया गया है. साथ ही न ही निर्गत अधिपत्र और प्रोसेस का तामिला प्रतिवेदन ही भेजा गया है. इससे वाद की कार्रवाई आपके कारण लंबे समय से अनावश्यक रूप से बाधित हो रही है. अत: इस कारण पृच्छा के द्वारा आप न्यायालय में 15 दिनों के भीतर सदेह उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि किन परिस्थितियों में उक्त नामांकित अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है.

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