कराहते रहे मरीज, सोया रहा डॉक्टर

लापरवाही. मॉडल अस्पताल में जच्चे-बच्चे की जान पर खतरा रात में इमरजेंसी केस आने पर भी नहीं मिलते हैं डाॅक्टर गोपालगंज : जीने की ख्वाहिश में मरने आते हैं, वो आएं न आएं हम इंतजार करते हैं. शाम ढलते ही जब रात की चादर सूबे के मॉडल व आइएसओ प्रमाणित सदर अस्पताल पर पड़ती है, […]

लापरवाही. मॉडल अस्पताल में जच्चे-बच्चे की जान पर खतरा

रात में इमरजेंसी केस आने पर भी नहीं मिलते हैं डाॅक्टर
गोपालगंज : जीने की ख्वाहिश में मरने आते हैं, वो आएं न आएं हम इंतजार करते हैं. शाम ढलते ही जब रात की चादर सूबे के मॉडल व आइएसओ प्रमाणित सदर अस्पताल पर पड़ती है, तो हर मरीज यहां के डाॅक्टरों से मन ही मन यही कहता है. गरीब मरीज मॉडल अस्पताल में हर छोटी-छोटी सुविधा तलाशता है, लेकिन यहां प्रबंधन की मनमानी कहें या कुछ और. हर कदम पर मरीजों को कीमत चुकानी पड़ती है. शनिवार की रात ऐसा ही कुछ देखने को मिला. बैकुंठपुर सीएचसी से रेफर होकर आयी विभा पांडेय की हालत गंभीर थी. प्रसव के बाद डांक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया था.
लेकिन, यहां रात के दो बजे पहुंचने पर डाॅक्टर ही नहीं मिले. नर्सें थीं, लेकिन लेबर वार्ड से गायब थीं. विभा की रात जैसे-तैसे तड़प कर बीती. सुबह होने पर उसने सिविल सर्जन से शिकायत की. परिजनों ने बताया कि चिल्लाने के बाद भी कोई डाॅक्टर नहीं पहुंचा. पूरी रात अस्पताल प्रबंधन सोया रहा. प्रसव वार्ड में यह कहानी सिर्फ विभा पांडेय और उनके परिजनों की नहीं थी, बल्कि हर मरीजों के पास इस तरह की शिकायत थी.
भगवान भरोसे रहती है मरीजों की जान, विभाग खामोश
घुटन महसूस करते हैं मरीज
बाथरूम इस्तेमाल लायक नहीं है. वार्ड के अंदर एसी बंद होने पर घुटन महसूस होती है. सिधवलिया व मांझा से आये मरीजों ने कहा कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटा दिया जाता है. ऐसे में जच्चा-बच्चा दोनों पर खतरा रहता है.
नर्स और दाई कराती हैं प्रसव
सदर अस्पताल के लेबर वार्ड में डाॅक्टर के बजाय दाई और ममता प्रसव कराती हैं. दिन में नर्स दिख भी गयीं, तो रात में ड्यूटी से गायब रहती हैं. डाॅक्टरों के बारे में पूछिए मत. इमरजेंसी केस आने पर भी डाॅक्टर नहीं मिलते हैं. सिविल सर्जन या जिला प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत करने पर डाॅक्टर मरीजों की जांच के लिए आते हैं.
गंदगी से संक्रमण का खतरा
प्रसव वार्ड में गंदगी से मरीजों को एक पल भी रह पाना मुश्किल है. लेकिन, मजबूरन उन्हें रहना पड़ रहा. मेडिकल कचरे से लेकर इंजेक्शन जहां-तहां फेंके जाने के कारण जच्चा-बच्चा दोनों पर संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. रविवार की सुबह मरीजों ने सिविल सर्जन से साफ-सफाई नहीं होने तथा गंदगी रहने की शिकायत की.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
जैसे ही सूचना मिली, डाॅक्टर को तत्काल भेज कर इलाज कराया गया. सफाई एजेंसी को चेतावनी दी गयी है. दुबारा शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी.
डाॅ मधेश्वर प्रसाद शर्मा, सिविल सर्जन, गोपालगंज

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