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Bihar News: गया पहुंचा निपाह वायरस का वाहक ग्रेटर फ्रूट बैट, फल उत्पादकों के लिए भी खतरा

Bihar News शोध विशेषज्ञों के मुताबिक गया में काॅमन पीपी स्ट्रीली व ग्रेटर येलो हाउस बैट की प्रजातियां पायी जाती हैं, जो 200 से 300 ग्राम के होते हैं. लेकिन, ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट की मौजूदगी पहली बार मिली है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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गया पहुंचा निपाह वायरस का वाहक ग्रेटर फ्रूट बैट
गया पहुंचा निपाह वायरस का वाहक ग्रेटर फ्रूट बैट
सोशल मीडिया

गया शहर के आसमान में ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट (चमगादड़ की बड़ी प्रजाति) की मौजूदगी मिली है. गांधी मैदान व इसके आसपास के इलाके में ये पाये गये हैं. इंडियन फ्लाइंग फाॅक्स के नाम से भी जाने जाने वाले ये चमगादड़ 0.6 किलो से 1.6 किलो तक के होते हैं. अब तक शहर में इतनी बड़ी संख्या में चमगादड़ के इस प्रजाति को नहीं देखा गया था. शोध विशेषज्ञों के मुताबिक गया में काॅमन पीपी स्ट्रीली व ग्रेटर येलो हाउस बैट की प्रजातियां पायी जाती हैं, जो 200 से 300 ग्राम के होते हैं. लेकिन, ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट की मौजूदगी पहली बार मिली है.

यह शहर के लिए चिंता का विषय है. यह चमगादड़ सात खतरनाक वायरस का वाहक है व कई बीमारियां फैलाता है. यह मुख्य तौर पर निपाह वायरस, रैबिज वायरस, सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स), मार्स सीओवी, मारबर्ग वायरस व हेंड्रा वायरस का वाहक है. मगध विश्वविद्यालय के पीजी डिपार्टमेंट आॅफ जूलाॅजी के पीएचडी स्काॅलर मो. दानिश के मुताबिक गया शहर व इसके आसपास इस प्रजाति के चमगादड़ पहले कभी नहीं देखे गये हैं.

फल उत्पादकों के लिए भी खतरा

पीएचडी स्कॉलर मो दानिश ने बताया कि उन्हें आशंका है कि कहीं इनके अावास स्थल पर छेड़छाड़ हुई है और उसके बाद ही चमगादड़ वहां से पलायन कर इस ओर पहुंचे हैं. चमगादड़ फल उत्पादकों के लिए भी खतरा हैं. फ्रूट बैट कीटभक्षी चमगादड़ों से अलग होते हैं. आहार के लिए ये फलों पर निर्भर रहते हैं.

फलों का पता लगाने के लिए सूंघने की क्षमता का प्रयोग करते हैं, जबकि कीट भक्षी चमगादड़ प्रतिध्वनि की सहायता से अपने शिकार का पता लगाते हैं. ग्रेटर फ्रूट बैट बगीचों में घुस कर फलों को नुकसान तो पहुंचाते तो ही हैं. ऐसे में अधिक दिनों तक शहर में इन चमगादड़ों की मौजूदगी शहर में वायरल संक्रमण के खतरे को आमंत्रण दे सकता है.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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