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मगध मेडिकल का ब्लड सेपरेशन यूनिट मार्च तक होगा चालू, 15 जनवरी तक ट्रेनिंग लेकर लौटेंगे डॉक्टर, इन मरीजों को मिलेगी राहत

By Prabhat Khabar Print Desk
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गया. मगध मेडिकल स्थित ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन यूनिट मार्च तक शुरू किये जाने के आसार दिखने लगे हैं. इसके लिए अस्पताल परिसर के ब्लड बैंक के सामने वाले कमरे में सेपरेशन यूनिट के लिए विभिन्न तरह की मशीनों को लगाया जा रहा है.

आशा व्यक्त की जा रही है कि जल्द ही सारा काम को पूरा कर लिया जायेगा. यूनिट चालू होने के ब्लड डोनेशन में आये खून से प्लेटलेट्स आदि निकाल कर दूसरे मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जायेगा.

प्लेटलेट्स का इस्तेमाल मुख्य तौर पर डेंगू व अन्य मरीजों के लिए किया जाता है. अब तक यहां ब्लड को कुछ प्रक्रिया पूरी करने के बाद दूसरे मरीज को चढ़ाने के लिए दे दिया जाता रहा है. यूनिट को शुरू करने के लिए डॉक्टर तीन माह की ट्रेनिंग करके 15 जनवरी तक वापस आ जायेंगे.

अस्पताल प्रशासन की ओर से भी यूनिट को चालू करने में हर तरह की सुविधाओं को मुहैया कराया जा रहा है. इस यूनिट में एसडीपी प्लेटलेट, यानि प्लेटलेट्स डोनर मशीन लगाये जा रहे हैं.

इस मशीन से रक्तदाता के शरीर से सीधे रूप से प्लेटलेट्स निकाली जायेंगी, जो मुख्य रूप से डेंगू अन्य मरीजों के लिए काम में आयेगी. जिले में यह पहली मशीन होगी, जिससे रक्तदाता के शरीर से प्लेटलेट्स अलग होकर गंभीर मरीजों के काम में लाया जायेगा.

डेंगू समेत अन्य बीमारियों जिनमें प्लेटलेट्स में कमी हो जाती है, उनके लिए यह काम आयेगी. इसकी स्टोरेज क्षमता केवल पांच दिनों की है, इसलिए इसे फ्रेश ब्लड में से ही निकाला जायेगा.

माइनस 40 से 80 डिग्री के तापमान वाला लगाया जा रहा फ्रिज

प्लेटलेट्स को प्रिजर्व रखने के लिए माइनस 40 व 80 डिग्री के फ्रिज लगाये जा रहे हैं. फ्रिज प्लेटलेट एजुकेटर, ट्रायोसेंटरी फ्यूज, मेनिमर फ्लो व एसडीपी के अलावा दो अलग से रेफ्रिजरेटर भी लगाये जा रहे हैं.

यह दोनों फ्रिज माइनस 40 डिग्री और माइनस 80 डिग्री तापमान वाले हैं. यह फ्रिज प्लेटलेट्स अन्य कंपोनेंट को प्रिजर्व रखने के लिए उपयोग में लाया जायेगा.

यहां दो रेफ्रिजरेटर, प्लेटलेट एजुकेटर, ट्रायोसेंटरी फ्यूज, मेमिनर फ्लो, एसडीपी प्लेटलेट डोनर मशीन, डोनर कोच, प्लेटलेट्स हेजीटेटर और एक -40 डिग्री और एक -80 डिग्री का फ्रीज यूनिट में लगाने के लिए लाया गया है.

यूनिट का निर्माण कार्य पूर्व में पूरा हो चुका है. यूनिट में वायरिंग का काम चल रहा है. इसके साथ ही मशीन लगाये जा रहे हैं. अधीक्षक खुद इस यूनिट को शुरू करने के लिए मॉनीटरिंग कर रहे हैं.

इन मरीजों को आयेगा काम

ब्लड बैंक के डॉ संजय गुप्ता ने बताया कि एक यूनिट ब्लड से कई तरह के चीज को निकाल कर अलग-अलग मरीजों को ठीक करने में इसका इस्तेमाल किया जायेगा.

जले हुए मरीजों हेमोग्लोबिन की कमी के लिए फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी), गर्भवती महिलाओं में खून की कमी व एनीमिया जैसी बीमारियों के लिए लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), डेंगू के मरीजों के लिए श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) प्लेटलेट्स आदि का इस्तेमाल किया जायेगा.

Posted by Ashish Jha

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