गया : बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) द्वारा आयोजित प्रथम इंटरस्तरीय संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. इस परीक्षा को संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन चौकसी के साथ जुटा रहा. जानकारी के मुताबिक, करीब 26 हजार परीक्षार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया. रविवार को यह परीक्षा 51 केंद्रों पर हुई.
चार चरण में आयोजित की जानेवाली परीक्षा का प्रथम चरण रविवार 29 जनवरी को हुआ. परीक्षा 11 बजे से लेकर 1:15 तक चली. परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर एक घंटा पहले आकर रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया था. शहर व उसके आसपास के स्कूल, महाविद्यालयों व संस्थानों में कुल 51 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में स्टैटिक, केंद्र प्रेक्षक, गश्ती दल, उड़नदस्ता, केंद्राधीक्षकों की तैनाती की गयी थी.
दृष्टिहीनों के लिए श्रुतिलेख उपलब्ध कराये गये थे. किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट आदि को परीक्षा केंद्र में नहीं ले जाने दिया गया. अभ्यर्थियों की गहन तलाशी के बाद ही उन्हें केंद्र में प्रवेश की अनुमति दी गयी. कदाचार को रोकने के लिए वीडियोग्राफी करायी गयी. जहानाबाद से परीक्षा देने आये दीपक यादव ने बताया कि सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल आसान से थे, पर मैथ्स कठिन था. साथ ही फिजिक्स से भी पूछे गये सवाल कठिन थे. उन्होंने बताया कि मैथ्स के प्रोबेबलिटी से जुड़े सवाल थे. परमाणु रिएक्टर संबंधी सवाल भी पूछे गये थे. नवादा से आये राजीव रंजन ने बताया कि सामान्य ज्ञान बड़ा ही सरल था, लेकिन मैथ्स से जुड़े सवालों ने उलझा कर रख दिया. हालांकि उन्होंने दावा किया कि उन्होंने करीब 90 प्रतिशत सवालों काे हल किया.
बीएसएससी की परीक्षा देने आये अभ्यर्थियों को घर वापसी के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ा. सात निश्चय यात्रा के तहत शहर में मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला पुलिस ने समाहरणालय मार्ग को आम लोगों के लिए बंद कर दिया था. इसकी वजह से विभिन्न मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव अधिक बढ़ गया था. विभिन्न मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही.
जाम को देखते हुए बड़ी संख्या में ऑटोवालों ने अपना रूट ही बदल लिया. रिक्शावाले भी सड़क से गायब हो गये थे. इसकी वजह से अभ्यर्थियों को स्टेशन व बस स्टैंड जाने के लिए ऑटो व रिक्शे नहीं मिले. उन्हें पैदल ही मंजिल की ओर सफर करना पड़ा. दोपहर एक बजे के बाद से सड़कों पर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें दिखने लगी. कुछ अभ्यर्थी ऑटो व रिक्शे की तलाश में सड़क किनारे खड़ा रहे पर उन्हें कोई साधन घर जाने को नहीं मिला. मुख्यमंत्री की यात्रा अभ्यर्थियों के लिए परेशानियों से भरी रही.
