उल्लेखनीय है कि संघ की तरफ से मगही के लिए जंतर-मंतर पर धरना भी दिया जा चुका है. राष्ट्रीय भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष त्रिभुवन कुमार मिश्रा ने भी डॉ कुमार की पहल का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि देश के करीब 24 जिलों के लोग मुख्य रूप से भोजपुरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. इसके अतिरिक्त देश के बाहर मॉरीशस, त्रिनिदाद, सूरीनाम व फिजी में भी बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी भाषा का उपयोग करते हैं. इस स्थिति के मद्देनजर भोजपुरी को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए. इस मांग को नजरअंदाज किये जाने की स्थिति में धरना-प्रदर्शन व सत्याग्रह के रास्ते भी अख्तियार किये जा सकते हैं.
मगही व भोजपुरी के लिए पीएम को ''प्रेमपत्र''
गया/कोलकाता: राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता डॉ प्रेम कुमार ने राज्य की दो प्रमुख भाषाओं के हित को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री (पीएम) नरेंद्र भाई मोदी को एक पत्र लिखा है. विगत 16 जनवरी को लिखे इस पत्र में गया नगर के विधायक डॉ कुमार ने मगही और भोजपुरी को संविधान की आठवीं […]

गया/कोलकाता: राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता डॉ प्रेम कुमार ने राज्य की दो प्रमुख भाषाओं के हित को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री (पीएम) नरेंद्र भाई मोदी को एक पत्र लिखा है. विगत 16 जनवरी को लिखे इस पत्र में गया नगर के विधायक डॉ कुमार ने मगही और भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए पीएम से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि करीब 10 करोड़ की आबादी मगही भाषा का प्रयोग करती है.
इसी तरह बिहार और उत्तर प्रदेश की एक बड़ी आबादी भोजपुरी भाषा का इस्तेमाल करती है. देश के एक बड़े भूभाग में रहनेवाली एक बड़ी आबादी के लिए इन दोनों ही भाषाओं के महत्व को देखते हुए श्री कुमार ने लिखा है कि जैसे बिहारी की ही एक अन्य महत्वपूर्ण भाषा मैथिली को आठवीं अनुसूची में जगह दी गयी है, उसी प्रकार मगही व भोजपुरी के लिए भी विचार किया जाना चाहिए. उधर, कोलकाता में मगही नागरिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पारस कुमार सिंह ने डॉ कुमार की इस पहल का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बाद डॉ कुमार ने भी मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह दिलाने के लिए जो प्रयास किया है, वह प्रशंसनीय है.