राजस्व वसूली के लक्ष्य से नगर निगम कोसों दूर

चिंता. लक्ष्य 11 करोड़ का, पर अब तक छह करोड़ की ही वसूली गया : वित्त वर्ष 2016-2017 के लिए गया नगर निगम ने 11 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा था, लेकिन वसूली की रफ्तार बेहद सुस्त है. यही सुस्ती अगर जारी रही, तो राजस्व उगाही में नगर निगम पिछड़ जायेगा. नगर […]

चिंता. लक्ष्य 11 करोड़ का, पर अब तक छह करोड़ की ही वसूली

गया : वित्त वर्ष 2016-2017 के लिए गया नगर निगम ने 11 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा था, लेकिन वसूली की रफ्तार बेहद सुस्त है. यही सुस्ती अगर जारी रही, तो राजस्व उगाही में नगर निगम पिछड़ जायेगा.
नगर निगम सूत्रों ने कहा कि वित्त वर्ष के नौ महीने गुजर चुके हैं, लेकिन अब तक महज छह करोड़ रुपये ही निगम के कोष में आये हैं. अब बचे हैं तीन माह. इसी तीन महीने में नगर निगम को अपने लक्ष्य पर पहुंचने के लिए 5 करोड़ रुपये का राजस्व वसूलना होगा, जो बेहद मुश्किल लग रहा है.
बताया जा रहा है कि नगर निगम ने इस बार होल्डिंग टैक्स में वसूली पर काफी जोर दिया है. शुरुआती दौर में टैक्स वसूली में तेजी थी भी, लेकिन नगर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका. सूत्रों ने बताया कि होल्डिंग व अन्य स्रोतों से निगम को जो आय होती है उसी से कर्मचारियों की तनख्वाह दी जाती है, एक साल में कर्मचारियों के वेतन का आधा पैसा भी टैक्स के रूप में निगम वसूल नहीं पा रहा है.
हर साल 20.53 करोड़ जाते हैं कर्मचारियों के वेतन पर : बताया गया है कि निगम एक साल में अपने कर्मचारियों के वेतन पर औसतन 20.53 करोड़ रुपये खर्च करता है. निगम हर वर्ष औसतन 10 करोड़ रुपये का राजस्व वसूलता है. निगम सूत्रों ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन के लिए भी निगम को राज्य सरकार के अनुदान पर निर्भर रहना पड़ता है. इस बार केदारनाथ मार्केट व चौक टेंपो स्टैंड से निगम के कर्मचारी खुद जाकर टैक्स की वसूली कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि निगम कर्मचारी निशांत कुमार उर्फ मुकुल सिंह केदारनाथ मार्केट से रोज 27100 रुपये वसूलते हैं.
वहीं, चौक टेंपो स्टैंड से निगम कर्मचारी प्रमोद कुमार रोज 6000 रुपये वसूलते हैं.
बैठकों में ही बीत गया पिछला साल
होल्डिंग टैक्स पर निजी कंपनी कर रही काम
होल्डिंग टैक्स के पुनर्निर्धारण के लिए एक प्राइवेट कंपनी काम कर रही है. इसके लिए एक वार्ड में जांच का काम अभी पूरा किया गया है. इसके बाद हर घर को एक यूनिक नंबर दिया जायेगा. कंपनी का दावा है कि उसके बाद निगम की आय 30 करोड़ से अधिक पहुंच जायेगी. इसके साथ ही अब तक इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम व जवाहर टाउन हॉल का जीर्णोद्धार का काम अब तक शुरू नहीं किया जा सका है. दोनों हॉल को ठीकठाक कर लिया जाये, तो शादी समारोह में इस हॉल को देकर निगम की आय बढ़ायी जा सकती है.
राजस्व वृद्धि को लेकर बैठकें ही होती रहीं
निगम सूत्रों ने बताया कि राजस्व वसूली में गिरावट की मुख्य वजह राजस्व बढ़ाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जाना है. अलबत्ता बैठकों का दौर खूब चला. बताया जा रहा है कि राजस्व में वृद्धि के लिए कई बैठकें आयोजित की गयीं. कई फैसले भी लिये गये, पर उसे जमीन पर उतारने के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी. राजस्व में बढ़ोतरी के लिए निगम की खाली जमीन पर मार्केट कॉम्पलेक्स बना कर उसे भाड़े पर देना, होल्डिंग की दोबारा जांच व मापी कर टैक्स तय करना शामिल हैं. इनमें से मार्केट काॅम्पलेक्स बनाने के मामले में निगम बोर्ड के सदस्यों में काफी विवाद रहा. विवाद के कारण ही 27 दिसंबर को आहूत निगम की स्टेंडिंग कमेटी की बैठक में सभी सदस्य नहीं पहुंच सके थे, जिस कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा था.

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