कैरियर: मेडिकल का क्षेत्र बना बेटियों की पहली पसंद, रास नहीं आती इंजीनियरिंग

गया: मेडिकल की अपेक्षा आइआइटी में सीट अधिक होने के बावजूद यह फिल्ड बेटियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है. शहर की छात्राएं मेडिकल को ही तव्वजो दे रही हैं. कैरियर को लेकर उनकी पहली पसंद चिकित्सा का क्षेत्र है. यही वजह है कि जेइइ में पास होनेवाली छात्राओं की संख्या न के बराबर […]

गया: मेडिकल की अपेक्षा आइआइटी में सीट अधिक होने के बावजूद यह फिल्ड बेटियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है. शहर की छात्राएं मेडिकल को ही तव्वजो दे रही हैं. कैरियर को लेकर उनकी पहली पसंद चिकित्सा का क्षेत्र है.
यही वजह है कि जेइइ में पास होनेवाली छात्राओं की संख्या न के बराबर है. अब तक के प्राप्त अांकड़ों के मुताबिक शहर से सिर्फ एक ही छात्रा ने जेइइ में सफलता प्राप्त की है. बाकी लड़कों का ही दबदबा है. रविवार की शाम जेइइ का परिणाम सामने आया. शहरी क्षेत्र से करीब 50 बच्चों ने जेइइ में सफलता हासिल की.
इसमें एक ही लड़की है. यह हाल तब है जब बड़ी संख्या में लोग बेटियों को पढ़ाने के लिए बहुत हद तक तत्पर हैं. बावजूद इसके बेटियां जेइइ की प्रतियोगी परीक्षा दरकिनार कर मेडिकल की तैयारी में जुटती हैं. जबकि, देश में भर में मेडिकल की उपलब्ध सीटों की तुलना में आइआइटी में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में सीट उपलब्ध होता है. फिर भी उन्हें मेडिकल का क्षेत्र ही काफी रास आता है.
आखिर ऐसा क्यों
इस सवाल का जवाब तलाशा गया, तो पता चला कि इसके कई वजह हैं. पहली वजह मैथ्स के पचड़े में नहीं पड़ना. दूसरी उनकी पहली पसंद है. तीसरी उनके अभिभावकों द्वारा थोपा गया विषय व चौथी इंजीनियरिंग का क्षेत्र रास नहीं आना है.

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