शनिवार को भ्रातृ द्वितीया (भैया दूज) पर्व है. इस तिथि को यमुना स्नान यमराज के भय से मुक्त करता है. बहन के घर भोजन करने से भाई दीर्घायु होता है. इससे बहन का सौभाग्य बढ़ता है. ब्रह्माजी द्वारा गयाधाम में यज्ञ किये जाने की बेला में सभी तीर्थों के साथ यमुना तीर्थ का भी आवाह्न हुआ था. गया-शेरघाटी मार्ग में विष्णुगंज ग्राम के पास यमुना नदी के यमकरण घाट पर यमुना तीर्थ है. यहां भैया दूज को यमुना स्नान होता है. भैया दूज पर्व पर मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना स्नान विश्व प्रसिद्ध है. इस तिथि को यमराज अपनी सगी बहन यमुना के घर गये थे. यमुना ने अपने भाई के ललाट में तिलक लगाया व आदरपूर्वक भोजन कराया था. बहन यमुना के वरदान मांगने पर यमराज ने कहा था कि आज यमुना नदी में मथुरा के विश्राम घाट पर स्नान करने वाला यमलोक नहीं जायेगा. कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने यहां विश्राम किया था. इससे विश्राम घाट को तीर्थ माना गया. इस तिथि को यमुना स्नान व बहन के हाथ से भोजन करना शस्त्र विहित है. सगी बहन नहीं रहने पर चचेरी, ममेरी, मौसेरी अथवा फुफेरी बहन के हाथों से बना भोजन तथा उसे दक्षिणा देकर संतुष्ट करना कल्याण कारक है. इससे भाई की सभी अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं. -आचार्य लालभूषण मिश्र ‘याज्ञिक’
बहन के घर भोजन करने से दीर्घायु होता है भाई (भैया दूज पर विशेष)
शनिवार को भ्रातृ द्वितीया (भैया दूज) पर्व है. इस तिथि को यमुना स्नान यमराज के भय से मुक्त करता है. बहन के घर भोजन करने से भाई दीर्घायु होता है. इससे बहन का सौभाग्य बढ़ता है. ब्रह्माजी द्वारा गयाधाम में यज्ञ किये जाने की बेला में सभी तीर्थों के साथ यमुना तीर्थ का भी आवाह्न […]
