गया: हम लोगों के पास डिग्री नहीं है, लेकिन मरीजों का इलाज करने का हुनर अवश्य है. जब तक आरएमपी डिग्रीधारी डॉक्टरों के निजी क्लिनिक व नर्सिग होम में काम कर रहे होते हैं, तो उनकी काबिलीयत पर कोई सवाल खड़ा नहीं किया जाता है.
वहां हम लोगों से सूई देने से लेकर ऑपरेशन तक कराया जाता है. डॉक्टर की अनुपस्थिति में भी मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन डिग्रीधारी डॉक्टरों की क्लिनिक व नर्सिग होम छोड़ते ही हम लोगों के हुनर पर सवाल खड़ा किया जाता है. ये बातें आरएमपी संघ के जिला अध्यक्ष विनोद कुमार जिया ने रविवार को गांधी मंडप में आयोजित आरएमपी संघ की जिला कार्यकारिणी की बैठक में कहीं.
जिला अध्यक्ष ने कहा कि आरएमपी को नीम-हकीम, झोलाछाप व मौत के सौदागर तक की उपाधि दे दी जाती है. लेकिन, जितनी मौत मेडिकल कॉलेजों में होती है, उसका शायद एक प्रतिशत भी आरएमपी के इलाज से नहीं होती है. मरीजों को डॉक्टरों द्वारा लिखे गये इंजेक्शन आरएमपी ही लगाते हैं. इसलिए जिला प्रशासन व राज्य सरकार से आरएमपी सम्मान के साथ जीने का हक अधिकार की मांगते हैं. उन्होंने आरएमपी को एक साल की ट्रेनिंग देने का राज्य सरकार के फैसले का स्वागत किया. श्री कुमार ने कहा कि हम लोग वैसे मरीजों की भी जान बचाते हैं, जिनके खाने का भी इंतजाम नहीं होता.
सचिव कृष्णनंदन कुमार ने कहा कि आरएमपी ऐसा कोई काम नहीं करें, जिससे उनकी बदनामी हो और पुलिस से भयभीत रहना पड़े. जितनी जानकारी है, उतना ही काम करें. वह भी पूरी सतर्कता से. बैठक में सर्वसम्मति से जिला मुख्यालय में संघ भवन बनाने का निर्णय लिया गया. सदस्यता अभियान तेज करने व पंचायत स्तर पर कमेटी गठित करने का भी निर्णय लिया गया. बैठक में सभी 24 प्रखंडों के अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष व जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने भाग लिया. इनमें जिला महासचिव राजा राम, उपाध्यक्ष दिलीप कुमार, संगठन सचिव जितेंद्र नारायण सिंह, संयोजक श्रीकांत प्रसाद, उप संयोजक कारू मेहरा, कोषाध्यक्ष विजय कुमार, आरपी सिंह, अशोक कुमार चक्रधारी, विनोद कुमार वर्णवाल, अशोक कुमार पाठक, विनोद कुमार त्रिपाठी, द्वारिका प्रसाद, योगेंद्र कुमार, अजय कुमार, विजय कुमार, संजीव कुमार व नागेंद्र कुमार आदि प्रमुख हैं.
