‘का कहिं मखदूम बाबा रउरे से प्यार बा..’

गया: गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन परिसर में रविवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया. इसमें कवियों ने श्रोताओं को अपनी कविताओं से खूब मनोरंजन किया. एमए जाफरी ने हिंदी गजल सुना कर सबका दिल जीत लिया. उन्होंने कहा, ‘सृजन के मार्ग में कांटे अधिक हैं, पुष्पों से. पथिक वही है, जो बेथकान चलता […]

गया: गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन परिसर में रविवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया. इसमें कवियों ने श्रोताओं को अपनी कविताओं से खूब मनोरंजन किया. एमए जाफरी ने हिंदी गजल सुना कर सबका दिल जीत लिया.

उन्होंने कहा, ‘सृजन के मार्ग में कांटे अधिक हैं, पुष्पों से. पथिक वही है, जो बेथकान चलता रहा..’ एजाज मानपुरी ने कहा, ‘खुद को जला कर रोशनी अपनों में बांट दी. राहों में उनकी मैंने अंधेरा नहीं किया.’

संजय कुमार सिंह ने मखदूम बाबा के लिए भोजपुरी में नज्म पढ़ी, ‘तोहरे शरण में जो भी आई ओकरे बेड़ा पार बा. का कहि मखदूम बाबा रउरे से प्यार बा’ गजेंद्र लाल अधीर ने कहा, ‘आ जा रे मनमोहन प्यारे, तुम बिन प्राण सकाम नहीं है.’ चंद्रदेव प्रसाद केशरी ने गीत गाये, ‘अल्लाह के गुलिस्तों का ये चमन, नफरत के कीड़ों से बरबाद न कर’ राम जपो, रहमान जपो..’ डॉ ब्रजराज मिश्र ने कहा, ‘दु:शासन चहूं ओ खड़ा है, चीर हरण की आस लगाये.’ डॉ विवेकानंद ने अपनी कविता में कहा, ‘कर रहे विध्वंस हो, निर्माण कैसे मान ले, हम ?’ डॉ रामकृष्ण ने कहा, ‘स्वर्ग में भी प्रलय आयेगा.

कभी सोचा न था.’ योगेश कुमार मिश्र, वासुदेव प्रसाद, मुद्रिका सिंह, रामलखन यादव, मनोज कुमार निराला, डॉ राम सिंहासन सिंह, सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र, संजीत, धीरज, रितेश व नीरज ने अपनी-अपनी कविताओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया. काव्य संध्या की अध्यक्षता डॉ रामकृष्ण ने की. इससे पूर्व, हिंदी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ राधानंद सिंह ने कहा कि जीवन सत्य को प्रकट करने का सशक्त माध्यम है कविता. अरुण हरलीवाल ने कहा, ‘कविता जबरदस्ती नहीं लिखी जा सकती. कविता के लिए छंद-अलंकार सत्यम्-शिवम्-सुंदरम् के समान हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >