बोधगया:मगध विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में प्राचार्यो की नियुक्ति की प्रक्रिया में गड़बड़ी करनेवाले लोगों पर अब निगरानी विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है. निगरानी विभाग अब इस मामले के दोषी लोगों पर एफआइआर करने की तैयारी में जुट गया है. शनिवार को इस मामले की जांच करने एमयू पहुंचे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी महाराजा कनिष्क कुमार सिंह ने बताया कि बहाल किये गये सभी 22 प्राचार्यो के प्रमाणपत्र व शोधपत्रों के आधार पर इंटरव्यू के दौरान चयन समिति द्वारा दिये गये अंकों की जांच की जा रही है. डीएसपी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर किये गये शोध के बदले में तीन-तीन अंक के हिसाब से कुल नौ अंक दिये जाने थे. इसके अलावा इंटरव्यू के वक्त अभ्यर्थियों द्वारा सौंपे गये शोधपत्र प प्रमाणपत्र का मिलान निगरानी के पास उपलब्ध कागजात से किया गया. उन्होंने बताया कि निगरानी विभाग ने सभी 22 अभ्यर्थियों से शोधपत्र व प्रमाणपत्र पहले ही हासिल कर चुका है.
अब इसका मिलान एमयू मुख्यालय में उपलब्ध प्रमाणपत्रों व शोधपत्रों से किया जा रहा है. हालांकि, एमयू द्वारा पहले ही सभी कागजात निगरानी को उपलब्ध करा दिये गये थे. पर, इसका भौतिक सत्यापन जरूरी था. साथ ही, संबंधित अधिकारियों से भी कई बिंदुओं पर पूछताछ करनी थी. डीएसपी ने बताया कि हाइकोर्ट के फैसले से पूर्व ही निगरानी इस मामले में जांच कर रही थी. लेकिन, अब नियुक्ति में गड़बड़ी होने के कारण बहाली को रद्द करने के हाइकोर्ट के फैसले से निगरानी विभाग के लिए जांच करना आसान हो गया. उन्होंने यह भी कहा कि हाइकोर्ट ने अपने फैसले में सिर्फ नियुक्ति को रद्द करने व छह माह के अंदर फिर से इंटरव्यू लेकर प्राचार्यो के चयन करने का निर्देश दिया है. पर, इस गड़बड़ी में संबंधित दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया है. इस कारण अब निगरानी इस मामले की जांच कर नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी करनेवाले दोषी लोगों पर मामला दर्ज करायेगा. उन्होंने बताया कि प्रमाणपत्रों व शोधपत्रों का मिलान किया गया व जरूरी कागजात एमयू से प्राप्त किया गया है.
इसके बाद कुलसचिव डॉ डीके यादव व मीटिंग इंचार्ज डॉ एमएस इसलाम से कई सवालों के जवाब मांगे गये हैं, जिसे पांच दिनों में उपलब्ध कराना है. डीएसपी ने बताया कि एमयू प्रशासन द्वारा जवाब उपलब्ध कराने व अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के दौरान दिये गये प्राप्तांकों की जांच के बाद दोषी लोगों पर मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जायेगी. डीएसपी श्री सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय दल जांच कार्य में लगा था. जांच के दौरान एमयू के कुलसचिव कार्यालय में संचिकाओं का ढेर लग गया व किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर भी रोक लगा रहा. जांच कार्य लगभग साढ़े चार घंटे तक चला. उल्लेखनीय है कि 2011-12 में पूर्व कुलपति डॉ अरुण कुमार के कार्यकाल में 22 प्रचार्यो की बहाली की गयी थी. इसके बाद चयन समिति के ही एक सदस्य ने हाइकोर्ट में नियुक्ति की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया था. इसके बाद जांचोपरांत हाइ कोर्ट द्वारा नियुक्ति को गलत करार देते हुए फिर से बहाली करने का निर्देश दिया है.
