गया: जी में पिंडदान के लिए लगभग एक लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं. गया श्रद्ध का मंगलवार को दूसरा दिन था. वैसे तिथि के अनुसार यह तीसरा दिन था. आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा के दिन प्रेतशिला, रामशिला व कागबली पिंडवेदियों पर श्रद्ध का विधान था.
लेकिन, पहले ही दिन दो तिथियों के आने से तीर्थयात्रियों के लिए थोड़ी परेशानी बढ़ गयी. एक दिन में दो तिथियोंवाली पिंडवेदियों व सरोवरों पर पिंडदान व तर्पण करना पड़ रहा है. मंगलवार को प्रेतशिला व रामशिला का विधान होने के बाद भी भीड़ फल्गु घाट पर ज्यादा थी.
यहां से पिंडदान व तर्पण कर देर से पिंडदानी प्रेतशिला व रामशिला गये. इधर, पिंडदानियों भीड़ रोज बढ़ रही है. सोमवार को यह देखने को भी मिला. हालांकि, तीर्थयात्रियों के ठहराने के लिए जिला प्रशासन व पंडा समाज ने बेहतर इंतजाम कर रखा है. 17 दिनी श्रद्ध कर्म करनेवाले तीर्थयात्री छह सितंबर को ही गयाधाम पधार गये हैं. वे आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तक श्रद्ध कार्य संपन्न कर घर लौटेंगे. उल्लेखनीय है कि ब्रrाकुंड में स्नान व तर्पण के बाद प्रेतशिला पर्वत की 676 सीढ़ियों पर चढ़ कर पिंडदानी ब्रrाशिला पर पिंड का स्पर्श कराते हैं.
तिल व सत्तू का मिश्रण चारों दिशाओं में उड़ाते हैं. शरीर से असमर्थ लोगों के लिए यहां खटोले की भी व्यवस्था की गयी है, जो ढाई से तीन सौ रुपये में ऊपर ले जाकर वापस ला रहे हैं. श्रद्धा व आस्था लिए कई विदेशी भी गयाधाम पहुंचे हैं. इनमें जापान व नीदरलैंड के लोग भी शामिल हैं. वह अपने पितरों का श्रद्ध कार्य करने यहां पहुंचे हैं. पितृपक्ष में की गयी व्यवस्था व पिंडदानियों का हाल जानने के लिए जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल, एसएसपी निशांत कुमार तिवारी, एसडीओ मो मकसुद आलम, डीआरडीए के डायरेक्टर शशि शेखर चौधरी व सिटी डीएसपी समेत कई अधिकारियों का दल विष्णुपद, गदाधर घाट, देवघाट, स्टेशन, प्रेतशिला, रामशिला व कागबली पिंडवेदियों का निरीक्षण किया. यह पहली बार हुआ कि गया का डीएम व एसएसपी प्रेतशिला की 676 सीढ़ियां चढ़ कर वहां का हाल जाना. वहां पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं देख कर डीएम ने तत्काल पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता वीरेंद्र कुमार को फोन कर पानी की व्यवस्था करने को कहा. डीएम ने सिविल सजर्न को ऊपर मेडिकल कैंप लगाने का भी निर्देश दिया. बाहर से आये तीर्थयात्रियों ने प्रशासन की तरफ से की गयी व्यवस्था की काफी सराहना की. डीएम ने जापानी तीर्थयात्री सुमी नाकातानी से भी बातचीत की. सुमी भारतीय परंपरा व संस्कृति से काफी प्रभावित नजर आयी. प्रशासनिक सहयोग के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों का आभार जताया व सराहना भी की.
