गया : प्रदेश सरकार धान की खरीदारी ऑनलाइन कर रही है. इतना ही नहीं, किसानों को धान का पेमेंट भी ऑनलाइन ही होना है, ताकि सहकारी समिति न सिर्फ डिजिटल तौर पर मजबूत हो बल्कि धान की खरीदारी में पारदर्शिता भी आये.
यह बातें गुरुवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित कार्यशाला में जिला सहकारिता पदाधिकारी निकेश कुमार ने कही. नये पैक्स अध्यक्षों को लेकर आयोजित इस कार्यशाला में जिले के कई पैक्स अध्यक्ष शामिल हुए.
जिले के सभी पैक्स ऑनलाइन पंजीकृत किसानों से ही धान की खरीदारी करेंगे. वसुधा केंद्र या साइबर कैफे से किसान ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं. अगर किसानों को पंजीयन कराने में किसी प्रकार की समस्या होती है तो बीडीओ व प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी से सहयोग प्राप्त कर सकते हैं.
जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि जिन पैक्सों के पास गोदाम नहीं है या उनका ऑडिट नहीं हुआ है, उसके लिए भी सरकार की ओर से निर्देश है. खरीफ विपणन मौसम 2019-20 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है. साधारण धान 1815 रुपये व ए ग्रेड धान 1835 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है. बताया गया कि पैक्सों को अनिवार्य रूप से नमी मापक यंत्र रखना होगा.
सभी पैक्सों के माप-तौल यंत्र का सत्यापन माप-तौल विभाग को करने का निर्देश दिया गया. धान क्रय केंद्र पर किसानों से भूमि संबंधित दस्तावेज के रूप में अंचल पदाधिकारी द्वारा निर्गत भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र, अद्यतन मालगुजारी रसीद व किसान क्रेडिट कार्ड इनमें से कोई भी एक की आवश्यकता होगी.
इस अवसर पर गुरुआ के बीसीओ बबलू कुमार व टिकारी के बीसीओ ने प्रशिक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी. इस मौके पर मगध सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष उमेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष राजीव सिंह, बिस्कोमान (बिहार-झारखंड) के निदेशक सह गुरुआ व्यापार मंडल अध्यक्ष विनय कुमार यादव, डीडीसी किशोरी चाैधरी, एसएफसी के जिला प्रबंधक कृष्ण मोहन प्रसाद, को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशक ओमप्रकाश निराला, निदेशक राजेश यादव, निदेशक नरेश प्रसाद, निदेशक सुनील मंडल सहित सभी प्रखंड के बीसीओ व नवनिर्वाचित पैक्स अध्यक्ष मौजूद थे.
सहकारिता कानून का पालन करें
इसके पहले सभी पैक्स अध्यक्षों को उनके अधिकार व कर्तव्य के बारे में बिंदुवार जानकारी दी गयी. उन्हें बताया गया कि पैक्स अध्यक्ष के जिम्मे क्या-क्या काम है. किस तरह उन्हें सरकारी योजनाओं के बारे में प्रचार-प्रसार करना है. साथ ही उन्हें कहा गया कि सहकारिता कानून का वे सभी गंभीरता से पालन करें. क्योंकि हर हाल में किसानों को लाभ पहुंचाना व सहकारिता को मजबूत करना ही सरकार का लक्ष्य है
