न गरमी, न धूप, बस जय श्री जगन्नाथ

गया : चार दिवसीय रथयात्र महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को बोधगया के जगन्नाथ मंदिर से रथयात्र निकाली गयी. इस दौरान श्रद्धालुओं को न तो गरमी की परवाह थी, और न ही धूप की, बस जय श्री जगन्नाथ के जयघोष. यात्र में शामिल होने दूर-दराज के लोग भी बोधगया पहुंचे थे. पुरी के आचार्यो के […]

गया : चार दिवसीय रथयात्र महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को बोधगया के जगन्नाथ मंदिर से रथयात्र निकाली गयी. इस दौरान श्रद्धालुओं को न तो गरमी की परवाह थी, और न ही धूप की, बस जय श्री जगन्नाथ के जयघोष. यात्र में शामिल होने दूर-दराज के लोग भी बोधगया पहुंचे थे. पुरी के आचार्यो के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सुबह आठ बजे मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र की नये परिधान व पुष्पों से अलंकृत कर पूजा की गयी.

गर्भगृह में पूजा-अर्चना के बाद उन्हें आसन से उतार कर बरामदे पर पुन: स्थापित कर आराधना की गयी. इसके बाद तीनों रथों को पुष्प-मालाओं से सजाया गया. तीनों विग्रहों को मंदिर से निकाल कर शंखनाद कर रथ पर आसीन कराया गया. इस दौरान मंदिर परिसर पहुंचे श्रद्घालुओं के बीच प्रसाद का भी वितरण किया जा रहा था. हाथी, घोड़े, ऊंट व गाजे-बाजे के साथ निकली रथयात्र जगन्नाथ मंदिर से निकल कर गांधी चौक होते हुए मौसा मोड़ पहुंची. रास्ते में जगह-जगह श्रद्घालुओं ने अपने घरों से पुष्पवर्षा की.

हर कोई रथ का रस्सा थामने को उत्सुक दिखा. श्रद्घालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया. रथयात्र उसी मार्ग से आगे बढ़ते हुए राजापुर, हनुमान मंदिर तक गयी, फिर सुजाता पुल के पश्चिमी भाग से होते हुए शंकराचार्य मठ पहुंची. जहां उनका रात्रि प्रवास हुआ. उल्लेखनीय है कि मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद यह दूसरी रथयात्र है.

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