गया : पिछले 16 दिनों से धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग डाटा ऑपरेटरों ने मंगलवार को एक नया खुलासा किया. आॅपरेटरों के मुताबिक वे लोग जिस भी एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे हैं, वह एजेंसी जबर्दस्त तरीके से घोटाला कर रही है. आॅपरेटरों के मुताबिक, उनका वेतन 11 हजार रुपये निर्धारित है. जिला स्वास्थ्य समिति से इतना ही वेतन बन कर जाता है.
महीने के अंत में उनकी एजेंसी के अधिकारी उनसे इतने ही वेतन के भुगतान पर हस्ताक्षर भी लेते हैं. लेकिन, उन्हें मिलते हैं केवल आठ हजार रुपये. यह स्थिति नयी नहीं है, लंबे समय से यह खेल चल रहा है. कर्मचारी इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें निकाल दिये जाने की सीधी धमकी मिलती है.
आॅपरेटरों के मुताबिक, इस विषय में उन लोगों ने जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को भी बताया, लेेकिन उन लोगों ने भी कोई कार्रवाई नहीं की. अधिकारियों का सीधा जवाब है कि विभाग ने आउटसोर्स एजेंसी को काम दे रखा है, ऐसे में एजेंसी कर्मचारी को कैसे मैनेज कर रहा है, क्या वेतन दे रहा है, इसमें अधिकारियों या विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है.
