गया : नगर निगम ने घरों से निकलनेवाले गिले कचरे से जैविक खाद बना कर किसानों के लिए बाजार में उतारने के लिए कदम बढ़ाया है. टेस्टिंग के तौर पर दो माह पूर्व निगम की विकास शाखा में खाद बनाने के लिए किट तैयार किये गये है. उन किटों में वार्ड नंबर 32 के घरों से निकलने वाले कचरे जमा किये गये हैं. जमा किये गये कचरे से जैविक खाद बन कर तैयार हो चुकी है.
करीब 20 कीट में तैयार की गयी जैविक खाद की पैकेजिंग और उसकी मार्केटिंग के गुर सीखने के लिए नगर निगम के कर्मचारी मुजफ्फरपुर नगर निगम जायेंगे. बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर नगर निगम द्वारा कचरे से जैविक खाद तैयार करने का काम पहले से चल रहा है. मार्केटिंग व पैकेजिंग के गुर सीखने के बाद किसानों के लिए बाजार में जैविक खाद के पैकेट बाजार में उतारे जायेंगे. बताया गया है कि शहर के 53 वार्डों में स्थानीय स्तर पर कचरा निष्पादन के लिए कई वार्डों में किट तैयार किया जा रहा है. निगम विकास शाखा में 40 अतिरिक्त किट तैयार किये गये हैं.
यह है जैविक खाद बनाने की विधि : ईंट का जालीदार किट बना कर ऊपर शेड बनाया जाता है. उसमें सबसे नीचे कच्चा नारियल (डाभ) का छिलका और उसके ऊपर गेहूं की भूसी, उसके बाद गिला कचरा डाला जाता है. एक फुट गिला कचरा के बाद फिर से भूसी व गोबर डाला जाता है. इसके साथ ही कुछ बूंद केमिकल के भी डाले जाते हैं. मुजफ्फरपुर में जैविक खाद बनाने का काम देख रहे विश्व रंजन ने बताया कि किट में गिला कचरा डाल कर करीब 60 दिनों तक छोड़ा जाता है.
10 से 15 दिनों पर किट में रखे कचरे को पलटना पड़ता है. उन्होंने बताया कि केमिकल डालने के बाद दुर्गंध व मक्खी से निजात मिल जाती है. खाद तैयार होने के बाद उसे सिविंग मशीन में डाला जाता है. चाय के दाने की तरह जैविक खाद मशीन से बाहर निकलती है. मुजफ्फरपुर के मेयर सुरेश कुमार ने बताया कि यहां पर जैविक खाद के पांच-पांच किलो के बैग तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सूखा कचरा से निकलने वाले प्लास्टिक, लोहा व अन्य चीज को कबाड़ी के यहां बेचा जाता है. मुजफ्फरपुर में अब लोग आदत में शामिल कर लिये हैं कि घरों में ही कचरा गिला व सूखा अलग-अलग रखना है.
