धनराेपनी ने पकड़ा जाेर, अभी आैर हाेगी बारिश

गया : मॉनसून बहुत अच्छा नहीं पर रुक-रुक कर हाे रही बारिश ने किसानाें काे राहत जरूर दी है. हालांकि माैसम विज्ञान केंद्र, पटना के माैसम विज्ञानी बताते हैं कि अभी आैर बारिश हाेगी. पर इस बार लगातार बारिश व जाेर की बारिश की संभावना कम दिखायी दे रही है. मॉनसून कमजाेर आया है. यूं […]

गया : मॉनसून बहुत अच्छा नहीं पर रुक-रुक कर हाे रही बारिश ने किसानाें काे राहत जरूर दी है. हालांकि माैसम विज्ञान केंद्र, पटना के माैसम विज्ञानी बताते हैं कि अभी आैर बारिश हाेगी. पर इस बार लगातार बारिश व जाेर की बारिश की संभावना कम दिखायी दे रही है. मॉनसून कमजाेर आया है. यूं रविवार की सुबह साढ़े आठ बजे से साेमवार की सुबह साढ़े आठ बजे तक जिले में 72.2 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गयी है. अभी हाल के दिनाें में शुरू हुई बारिश के बाद धान की राेपनी में किसान जुट गये हैं.
पूरा हाेगा धनराेपनी का लक्ष्य जिला कृषि पदाधिकारी अशाेक कुमार सिन्हा ने बताया कि साेमवार तक जिले में 56438 हेक्टेयर में, यानी 38 प्रतिशत जमीन पर धान की राेपनी की जा चुकी है. जिले में धान की राेपनी का लक्ष्य एक लाख 53 हजार हेक्टेयर में करने का रखा गया है. श्री सिन्हा ने बताया कि अभी इस पूरे महीने धान की राेपनी हाेगी.
उन्हाेंने दावा किया है कि लक्ष्य पूरा कर लिये जाने की संभावना है. खरीफ फसलाें में लक्ष्य के विपरीत अब तक मक्का 93.79 प्रतिशत में, मड़ुआ 52.50 प्रतिशत में, दलहन (अरहर, उड़द, मूंग व अन्य दलहनी फसलें) 67.35 प्रतिशत व तेलहन (मूंगफली, तिल, सूर्यमुखी, अंडी) 40.05 प्रतिशत जमीन में लगाये जा चुके हैं.
सवा दाे महीने में 114.8 मिलीमीटर कम हुई बारिश गाैरतलब है कि जुलाई में 294.5 मिलीमीटर बारिश की जरूरत के विपरीत 271.6 मिलीमीटर बारिश हुई. अगस्त में 280.9 मिलीमीटर बारिश की जरूरत के विपरीत छह अगस्त तक 76.9 मिलीमीटर बारिश हाे चुकी है. इस वर्ष जून, जुलाई व छह अगस्त तक 477.37 मिलीमीटर बारिश की जरूरत के विपरीत छह अगस्त तक 362.6 मिलीमीटर बारिश हुई.
इस तरह देखा जाये ताे इन सवा दाे महीनों में 114.8 मिलीमीटर कम बारिश हुई. इसकी वजह से राेपनी का विचलन 24.04 प्रतिशत का रहा.
देर से हुई बारिश ने मध्यम व छाेटे किसानाें की बढ़ायी परेशानी रविवार से साेमवार तक हुई बारिश इस माैसम में सबसे अच्छी बारिश कही जायेगी. किसानाें के चेहरे अभी खिले हैं.
लेकिन, देर से हुई बारिश की वजह से मध्यम व छाेटे किसानाें काे संसाधन समय पर नहीं मिलने की परेशानी झेलनी पड़ रही है. ट्रैक्टर, हल, बैल, खेतिहर मजदूर व राेपना मिलने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. जिस दिन खेत में पानी जमा हुआ उस दिन ट्रैक्टर व अन्य संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं. ऐसे में जरूरत पर राेपनी नहीं हाे पा रही है. चूंकि देर से बारिश हुई, ताे सबसे पहले साधन संपन्न किसान अपने खेताें में खेती का काम पूरा करने में लगे हैं.
मानपुर में धान लगे खेत हुए जलमग्न
मानपुर. पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण किसानों को धान रोपनी करने में आसानी हो रही है. लेकिन, कुछ हिस्सों में अधिक जल जमाव के कारण खेतों में रोपी गयी धान की फसल डूबने भी लगी है. इसके कारण धान के पौधों के सड़ जाने की संभावना बन गयी है. ऐसे, मानपुर प्रखंड में बरसात के पहले से ही धान की रोपनी होनी प्रारंभ हो चुकी थी.
लेकिन, अब बरसात अच्छी होने से शत प्रतिशत भू-भाग पर धान फसल की रोपनी होने का अनुमान बन चुका है. प्रगतिशील किसान वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जल स्तर में भी सुधार हो रहा है. जमीन के अंदर जो वाटर लेवल 30 से 40 फुट तक नीचे चला गया था, वह अब 20 से 25 फुट के पास आ चुका है. अभी वाटर लेवल के और ऊपर आने की संभावना है. इससे किसानों में खुशी है.
बेलागंज में बारिश से किसानों के खिले चेहरे
बेलागंज. सोमवार की अहले सुबह लगभग पांच बजे से क्षेत्र में हुई बारिश से बेलागंज और नगर प्रखंड के किसानों के चेहरे खिल गये. बारिश के पानी से खेतों और आहार-पोखरों में लबालब पानी भर गया है. किसान और बटाईदार खेतों में हल-बैल के साथ धान की रोपाई के लिए शिद्दत के साथ जुट गये. वहीं, लगातार बारिश होने से सब्जियों के खेतों पानी भरने से नेनुआ, झिंगी, भिंडी सहित तमाम सब्जियों के फसलों के नुकसान की आशंका से किसानों में काफी मायूसी देखी गयी.
किसानों ने बताया कि अहले सुबह से मूसलाधार बारिश से ज्यादातर खेतों में धान की रोपाई की संभावना बढ़ गयी है. वहीं, अपेक्षाकृत निचले क्षेत्रों के खेतों में बारिश के पानी ज्यादा रहने से खेतों की जुताई में भारी व्यवधान हो रहा है. जबकि, ऐसे खेतों में जहां पहले धान की रोपाई हो गयी है. वहां खेतों में अधिक पानी भरने से धान के पौधों के गलने की संभावना बढ़ गयी है. मूसलाधार बारिश से क्षेत्र में प्रवाहित नदियों में भी पानी आने से किसान काफी खुश नजर आ रहे हैं.
डुमरिया में पानी की कमी से जूझ रहे किसान
डुमरिया. जिले की दूसरी जगहों पर भले ही अच्छी बारिश हो रही है, पर डुमरिया प्रखंड के किसान अब भी पानी की कमी के कारण परेशान हैं. प्रखंड कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक अभी तक मात्र 20 प्रतिशत ही धान की रोपनी की गयी है. पानी के अभाव में धान की रोपनी प्रभावित है. धान रोपनी के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला नक्षत्र भी बीतने को है . पर्याप्त बारिश नहीं होने से अकाल की आशंका से किसान परेशान हैं. प्रखंड के तकरीबन 95 प्रतिशत भूमि पर धान की खेती की जाती है.
पानी की कमी के कारण लगाय गय धान के बिचड़ों को भी बचाना मुश्किल हो रहा है. वैसे, कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 10 अगस्त के बाद डुमरिया प्रखंड की पूरी स्थिति जिला को भेजी जायेगी. कई जानकार किसानों ने बताया कि समय बीत रहा है. समय रहते अगर वर्षा नहीं हुई, तो बिचड़े रोपनी के लायक नहीं रह जायेंगे. डीजल की कीमत से भी किसान परेशान हैं. बिजली तो पर्याप्त मात्रा में किसानों को मिल रही है पर, जमीन के अंदर पानी का लेयर नहीं होने से बोरिंग से भी किसान पटवन नहीं कर पा रहे हैं.

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