बरामदे पर ही बनता है एमडीएम का खाना
एनएच के किनारे है स्कूल, लेकिन नहीं है चहारदीवारी
एचएम कक्ष में ही रखा जाता है स्टोर का सामान
विद्यालय का भवन भी हो गया जर्जर
शेरघाटी : प्राथमिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है. बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर करोड़ों रुपये सरकार खर्च कर रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंच सकें, और उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके. लेकिन, प्रखंड के गोपाल पुर स्थित अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय में नामांकित बच्चों के अनुपात में कमरे की संख्या कम होने से इस स्कूल के बच्चे बरामदे पर पढ़ाई करने को विवश हैं. स्कूल में किचेन नहीं रहने के कारण बरामदे में ही एमडीएम का खाना बनाया जाता है.
वहीं नेशनल हाइवे के किनारे स्कूल होने और स्कूल में चहारदीवारी नहीं रहने से विद्यालय प्रबंधन हमेशा अनहोनी को लेकर सशंकित रहता है. स्कूल में चापाकल की कमी रहने के कारण स्कूल में पढ़ाई करनेवाले छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रह रही है. विद्यालय में नामांकित छात्रों की संख्या 104 है. प्रधानाध्यापक सहित शिक्षकों की संख्या तीन है. स्कूल में दो कमरे हैं, इसी में प्रधानाध्यापक कक्ष और स्टोर रूम भी है. विद्यालय में कहने को दो शौचालय हैं उसमें एक ही उपयोगी है. अभिभावक विद्यालय की घेराबंदी को लेकर शिक्षक पर लगातार दबाव बनाते हैं. लेकिन, इस पर किसी का ध्यान नहीं है.
क्या कहते हैं प्रभारी
इस संबंध में प्रभारी ब्रजेश प्रथम ने कहा कि विद्यालय में दो कमरे हैं. उससे भी पानी टपकता रहता है. दीवारों में दरारें पड़ गयी है. यहां पढ़ाई करनेवाले बच्चे हमेशा डरे सहमे रहते हैं. नेशनल हाइवे के किनारे स्कूल में चहारदीवारी नहीं रहने से हमेशा डर बना रहता है. उन्होंने बताया कि विद्यालय के भवन की स्थति से प्रखंड व जिला के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है.
क्या कहते हैं बीईओ
इस संबंध में बीईओ सुनील कुमार ने कहा कि विद्यालय के पास भवन के लिए जगह नहीं रहने से परेशानी है. स्थिति से अवगत कराते हुए विद्यालय के भवन के लिए जिले के वरीय पदाधिकारी को पत्र लिखा गया है.
