शहर के लोगों को नहीं मिल रहा पेयजल योजना का लाभ
15 किमी भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की योजना भी अधूरी
शेरघाटी : शहर में लोगों को पेयजल सुविधा देने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बने दो जलमीनार बेकार पड़े हैं. इनके निर्माण के करीब छह वर्ष गुजर गये, पर अब तक लोगों के घरों तक नल का पानी नहीं पहुंच सका है. अब गर्मी शुरू होते ही जलस्तर नीचे खिसकने से चापाकलों ने भी पानी देना कम कर दिया है, जिससे लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है. उल्लेखनीय है कि शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए 15 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की योजना थी.
कार्य की प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे मूूूूर्तरूप देना तो दूर की बात, अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन बिछायी ही नहीं गयी. अब तक सिर्फ मुख्य मार्ग में ही भूमिगत पाइपलाइन बिछी है. पौने तीन करोड़ की लागत से तैयार दो जलमीनारों काे भी चालू नहीं किया जा सका है. शहरवासी शैलेंद्र सिंह, मनजीत राठौर, मो सईद आदि का कहना है कि जनप्रतिनिधि व संबंधित अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यह अब सपना बन कर रह गया है.
पीएचईडी के स्टैंड पोस्ट में नहीं लगा नल: पीएचईडी ने शहरवासी व यहां आनेवाले लोगों की प्यास बुझाने के लिए प्रमुख स्थानों पर स्टैंड पोस्ट भी फिक्स किये हैं. लोगों की मानें, तो कई स्थानों पर लगे स्टैंड पोस्ट में नल ही नहीं लगाये गये. अब तो हाल यह है कि कई स्टैंड पोस्ट का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है.
क्या कहते हैं जेई
इस संबंध में जूनियर इंजीनियर रमेश कुमार ने कहा कि जलमीनार को स्थानीय नगर निकाय शेरघाटी को हैंडओवर कर दिया गया है. अब कर निर्धारण कर प्रत्येक घर को पानी पहुंचाने में उसे पहल करना है. जलमीनार के रखरखाव की जिम्मेदारी भी नगर पंचायत की ही है.
क्या कहती हैं मुख्य पार्षद
इस संबंध में मुख्य पार्षद लीलावती देवी ने कहा कि जलमीनार को सौंपे जाने का काम विभागीय तौर पर पूरा कर लिया गया है. लेकिन, जिस स्थिति में जलमीनार और पाइप बिछाने का काम अधूरा है, उससे लोगों के घरों तक पानी पहुंचाना संभव नहीं है. अध्यक्ष प्रतिनिधि विनय प्रसाद व सशक्त कमेटी सदस्य प्रेम प्रकाश ने बताया कि मुख्यमंत्री हर घर नल जल योजना के तहत शहर के 11 वार्डों का प्राक्कलन कार्यपालक अभियंता शहरी विकास अभिकरण गया को भेजा गया है. इन वार्डों में पांच करोड़ 71 लाख 97 हजार रुपये की अनुमानित राशि खर्च करने का अनुमान है. स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जायेगा.
