Darbhanga News: दरभंगा. मैथिली अकादमी के पुनर्गठन के मांग को लेकर पटना के गर्दनीबाग में पटना की चेतना समिति, दरभंगा का विद्यापति सेवा संस्थान, अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के बैनर तले मैथिली भाषियों ने धरना दिया. विवेकानंद झा की अध्यक्षता में मौके पर आयोजित सभा में संस्थान के महासचिव डॉ वैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि 1976 में स्थापित मैथिली अकादमी पर ताला लगना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने सरकार से इसे अविलंब पुनर्स्थापित करने की मांग की. कहा कि अष्टम अनुसूची में शामिल भाषा मैथिली की लिपि लाखों वर्ष पुरानी है. इस भाषा की चर्चा वाल्मीकि रामायण में है. उस भाषा के अकादमी को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार गंभीरतापूर्वक इस पर विचार कर यथाशीघ्र मैथिली अकादमी के पुराने स्वरूप को पुनः बहाल करे. वहीं अध्यक्षता करते हुए चेतना समिति के अध्यक्ष झा ने कहा कि चेतना समिति देश के सभी मैथिली सेवी संस्थाओं को एक साथ लेकर मैथिली अकादमी के पुनर्गठन के लिए चरणबद्ध आंदोलन करती रहेगी. प्रो. अयोध्या नाथ झा ने कहा कि मैथिली भाषा की साहित्य और संस्कृति बहुत ही समृद्ध है. मैथिली अकादमी को पुन: चालू करना अपरिहार्य है. गणपति झा ने कहा कि मैथिली अकादमी को इस हाल में ले जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. मणिकांत झा ने कहा कि जिस मैथिली अकादमी से दो सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हो उसका बंद होना हास्यास्पद है. मौके पर शिष्टमंडल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सीपी ठाकुर से मिला. मांग के समर्थन में प्रतिवेदन समर्पित किया. शिष्टमंडल में डॉ गणेशकांत झा, चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, विवेकानंद ठाकुर, उमेश मिश्र, अरविंद कुमार अक्कू, किशोर केशव आदि शामिल थे.
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