Darbhanga News: जाले प्रखंड क्षेत्र में चल रहे जनगणना कार्य के दौरान सीमावर्ती गांवों की प्रशासनिक स्थिति को लेकर भारी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है. भारत सरकार द्वारा भेजे गए नजरी नक्शे (Notional Map) में कई गांवों और टोलों को उनकी वर्तमान पंचायत और जिला सीमा से अलग दर्शाया गया है. इस विसंगति के कारण न केवल ग्रामीण असमंजस में हैं, बल्कि गणना कर्मियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है.
नक्शे में जिलों और पंचायतों की सीमाएं उलझीं
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नजरी नक्शे में मधुबनी जिले का जगवन गांव जाले की कंगनी पंचायत में दिखाया गया है. इसी प्रकार, राढ़ी पश्चिमी पंचायत के सौरिया गांव की आधी आबादी को पड़ोसी जिले सीतामढ़ी के क्षेत्र में दर्शाया गया है. विसंगति यहीं खत्म नहीं होती, सीतामढ़ी जिले की कुछ आबादी को जाले प्रखंड की कछुआ और कतरौल-बसंत पंचायत का हिस्सा बता दिया गया है. इसके अलावा सहसपुर पंचायत का खैराज टोला जोगियारा में और धनकौल पंचायत का कुछ हिस्सा करवा-तरियानी में दिखने से स्थानीय लोग हैरान हैं.
बीडीओ ने पटना भेजी रिपोर्ट
इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी पर संज्ञान लेते हुए प्रभारी बीडीओ मनोज कुमार ने बताया कि मूल राजस्व नक्शे (Revenue Map) और वर्तमान में प्राप्त नजरी नक्शे में काफी भिन्नता पाई गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्शों के इस अंतर के कारण जनगणना कार्य प्रभावित हो रहा है. इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मार्गदर्शन के लिए पटना भेजी जा रही है. जब तक विभाग से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलता, तब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति स्पष्ट होना मुश्किल है.
दरभंगा के जाले से केश्वेंद्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट
