मकर संक्रांति : बच्चों से सेवा का वचन लेंगे बुजुर्ग

मकर संक्रांति : बच्चों से सेवा का वचन लेंगे बुजुर्ग तैयारी को लेकर दिनभर बाजार में रही गहमा-गहमी वातावरण में मिठास घोलती रही घरों से उठती गुड़ के पाक की खुशबूफोटो संख्या- 17 व 18परिचय- लाइ-मुरही व गुड़ की दुकानों पर लगी खरीदारों की भीड़. दरभंगा. सामाजिक समरसता तथा मौसम में परिवर्तन के अनुरूप शरीर […]

मकर संक्रांति : बच्चों से सेवा का वचन लेंगे बुजुर्ग तैयारी को लेकर दिनभर बाजार में रही गहमा-गहमी वातावरण में मिठास घोलती रही घरों से उठती गुड़ के पाक की खुशबूफोटो संख्या- 17 व 18परिचय- लाइ-मुरही व गुड़ की दुकानों पर लगी खरीदारों की भीड़. दरभंगा. सामाजिक समरसता तथा मौसम में परिवर्तन के अनुरूप शरीर को ढालने का संदेश देने वाला पर्व मकर संक्रांति की तैयारी लोगों ने पूरी कर ली. शुक्रवार की सुबह पुण्यकाल में स्नान कर अपने इष्ट को तिल-गुड़ अर्पित करेंगे. इसके बाद घर के बुजुर्ग अपने छोटों से सेवा का वचन तिल-गुड़ देकर लेंगे. दान व हवन की भी लोगों ने तैयारी कर ली है. इसको लेकर बाजार में गुरुवार को दिनभर गहमागहमी बनी रही. पांच रूपों में तिल के प्रयोग का विधान मकर संक्रांति पर्व पर तिल के प्रयोग का विशेष महत्व है. शास्त्र के मुताबिक इस तिथि पर तिल के प्रयोग का बहुत लाभ मिलता है. विश्वविद्यालय पंचांग के संपादक सह कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. रामचंद्र झा कहते हैं कि इस अवसर पर पांच रूपों में तिल के प्रयोग का विधान है. तिल से स्नान, तिलदान, तिल भोजन, तिल से हवन तथा तिल ताप लेने का विधान है. इसे स्पष्ट करते हुए वे बताते हैं कि तिल से स्नान करने का वर्तमान में तात्पर्य है कि जल में तिल डालकर अथवा सिर पर तिल रखकर स्नान किया जाये. पुण्य स्नान की परंपराइस मौके पर पुण्य काल में स्नान की विशेष परंपरा है. इस वर्ष प्रात: 7.21 से दोपहर 1.45 तक पुण्यकाल है. इस दौरान पवित्र जल में स्नान कर पूजन-दान से फल दोगुना हो जाता है. ज्योतिषविदों के मुताबिक धनु से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है. इन दोनों राशियों में क्रमश: निकलने व प्रवेश के बीच का कालखंड संक्रमण काल कहलाता है. इस काल में प्रत्यक्ष देव सूर्य की ऊर्जा काफी अधिक होती है. इस अवधि में किये गये कार्य का फलाफल सामान्य से कई गुणा अधिक होता है. यही कारण है कि श्रद्धालु इस क्रम में पूजन, दान आदि में लगे रहते हैं. नयी पीढ़ी को कराते दायित्व बोध मिथिला में मकर संक्रांति पर पितरों के साथ ही भगवान को तिल-गुड़ अर्पित किये जाने की परंपरा है. सुबह स्नान के पश्चात भगवान को तिल-गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद स्वरूप घर के बड़े-बुजुर्ग अपने से छोटों के बीच इसका वितरण करते हैं. इस दौरान सेवा का वचन उनसे लिया जाता है. इस परंपरा के बहाने नयी पीढ़ी को उनके दायित्व का बोध कराने का प्रयास होता है. मिथिला में यह परंपरा अनूठी है जो सदियों से चली आ रही है. घर से ले बाजार में रही चहल-पहलइस पर्व के लिए लाइ तैयार करने के लिए जहां घर की महिलाएं पूरे दिन व्यस्त रहीं. वहीं बाजार में भी खूब चहल-पहल रही. अबतक त्योहार के निमित्त सामानों की खरीदारी नहीं कर सके लोगों का हुजूम बाजार में उमड़ पड़ा. तिल, गुड़, मुरही, चुड़ा आदि के साथ ही रेडिमेड लाइ व तिलकुट की दुकानों पर तांता लगा रहा. सामान घर ले जाकर महिलाओं ने लाइ बनाना आरंभ किया. गुड़ के पाक से उठती सौंधी खुशबू से आसपास का वातावरण सुवासित होता रहा.

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