कैंपस- भू संपदा पदाधिकारी समेत सुरक्षा कर्मियों पर प्राथमिकीदरभंगा : कासिंदसं विवि क्षेत्रान्तर्गत दरभंगा स्थित विद्यानंद संस्कृत महाविद्यालय के सहायक प्राचार्य डा. धैर्यनाथ चौधरी ने संस्कृत विवि के भू संपदा पदाधिकारी डा. उमेश झा सहित विवि में कार्यरत निजी सुरक्षाकर्मी पर कातिलाना हमला करने की प्राथमिकी ललित नारायण मिथिला विवि थाना में कांड संख्या 288/15 दर्ज करवाया है. थाना में दिये आवेदन में डा. चौधरी ने कहा कि 17 दिसंबर को विवि परिसर स्थित कर्मचारी आवास मंे रहनेवाले कर्मी सुनील सिंह के आवास पर सुबह 9.45 बजे साथ बैठकर चाय पी रहे थे उसी समय भू संपदा पदाधिकारी सुरक्षाकर्मी के साथ उनके आवास से मुझे जबरन खींचकर लाठी, डंडा, लात, मुक्का, थप्पड़ से मारने लगे. इतने में सुनील सिंह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ मिलकर मुझे बचाने आये तो लोगों को भी मारापीटा. डा. चौधरी ने कहा कि अगर सुनील सिंह अपने परिवार के साथ आकर नहीं बचाते तो मेरी हत्या तय थी. इस हमले में डा. झा के साथ मनोज पासवान एवं अन्य शामिल थे. उन्होंने कहा कि मारपीट में जख्मी होने के कारण डीएमसीएच से इलाज क रवाने के बाद दोषी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवायी है. इन्होंने आरोप लगाया है कि भू संपदा पदाधिकारी ने धमकी भी दी थी कि केस करोगे तो तुम्हे जान से मार देंगे. इन्होंने कुलपति से निवेदन किया है कि इस भू संपदा पदाधिकारी को पद से हटाते हुए केस दर्ज करवाने की मुझे अनुमति दें तथा डा. जहां मूल पद पर कार्यरत हैं वहां के शासी निकाय को ऐसे आपराधिक प्रवृति के आरोपी शिक्षकों को हटाने का आदेश दें. वहीं डा. झा की ओर से लाये गये आपराधिक प्रवृति वाले अवैध एजेेंसी के सुरक्षाकर्मी के स्थान पर दूसरे वैध एजेंसी के सुरक्षाकर्मी को प्रतिनियुक्त किया जाये. इसकी प्रतिलिपि डा. चौधरी ने कुलाधिपति पटना, उच्च शिक्षा सचिव पटना, पुलिस अधीक्षक दरभंगा सहित अन्य को स्पीडपोस्ट के माध्य से पे्रषित किया है.
कैंपस- भू संपदा पदाधिकारी समेत सुरक्षा कर्मियों पर प्राथमिकी
कैंपस- भू संपदा पदाधिकारी समेत सुरक्षा कर्मियों पर प्राथमिकीदरभंगा : कासिंदसं विवि क्षेत्रान्तर्गत दरभंगा स्थित विद्यानंद संस्कृत महाविद्यालय के सहायक प्राचार्य डा. धैर्यनाथ चौधरी ने संस्कृत विवि के भू संपदा पदाधिकारी डा. उमेश झा सहित विवि में कार्यरत निजी सुरक्षाकर्मी पर कातिलाना हमला करने की प्राथमिकी ललित नारायण मिथिला विवि थाना में कांड संख्या 288/15 […]
